बीकानेर. रबी की बिजाई के दौरान नहर में पानी नहीं होने से किसान गेहूं की बिजाई नहीं कर सके लेकिन अब किसान खरीफ में मूंगफली की बिजाई से भी वंचित होने की स्थिति में हैं। फिलहाल बिजाई के लिए दूर-दूर तक पानी मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
इंदिरा गांधी नहर के आने से जिन किसानों ने खेती संबंधी बड़े-बड़े सपने पाले थे वे अब धूमिल होते जा रहे हैं। हालत यह है कि किसान अब समय पर फसलों की बिजाई भी नहीं कर पा रहे हैं। रबी की फसल में सरकार ने यहां के किसानों को गेहूं की बिजाई करने से मना कर दिया तो अब मूंगफली की बिजाई के लिए पानी नहीं मिलने से पश्चिमी राजस्थान के किसान संकट में हैं।
कभी तारणहार मानी जाने वाली इंदिरा गांधी नहर आज समस्या की जड़ बनती जा रही है। मूंगफली की बिजाई अप्रैल में ही शुरू हो जाती है। मई के मध्य तक लगभग 80 प्रतिशत बिजाई हो जाती थी लेकिन इस बार सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से अब तक कोई किसान ने बिजाई नहीं कर सका है।
फिलहाल स्थिति को देखते हुए जून तक सिंचाई के लिए पानी के आसार नहीं है। अभी जो पानी चलाया जा रहा है वह अनिवार्य आवश्यकता का है और पेयजल के काम आ रहा है। बीकानेर कृषि विभाग के अंतर्गत करीब 15 हजार हैक्टेयर में मूंगफली की बिजाई होती है लेकिन अब तक यहां एक हैक्टेयर में भी बिजाई नहीं हो सकी। किसान बीज व खाद तैयार किए बैठे हैं लेकिन बिजाई का मौका नहीं मिल पा रहा है।
मूंगफली की अमूमन बिजाई जून में रिकमंड की जाती है लेकिन पश्चिमी राजस्थान में आंधियों को देखते हुए यहां मई मध्य तक बिजाई हो जाती है क्योंकि उसके बाद आंधी के साथ आने वाली मिट्टी मूंगफली के नवांकु रित पौधों को ढक लेती है और पौधे मर जाते हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसान जून तक बिजाई कर सकते हैं लेकिन उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं कि जून में होने वाली बिजाई को आंधियों से कैसे बचाएंगे।
>> यहां के किसान अब तक मूंगफली की बिजाई पूरी कर लेते हैं लेकिन इस बार पानी नहीं मिलने से बिजाई नहीं हुई है। अब यदि पानी मिला तब भी मूंगफली की बिजाई का क्षेत्रफल कम होने की आशंका है लेकिन कोई चिंता की बात नहीं है। जून में भी बिजाई कर सकते हैं। इसके अलावा जून में अन्य फसलों की बिजाई भी किसान कर सकते हैं।
होशियार सिंह, उपनिदेशक कृषि विभाग