जोधपुर. मंच पर कलाकार राजस्थानी वेश भूषा में घूमर नृत्य प्रस्तुत कर रही है व वातावरण में गूंज रहे हैं मारवाड़ी परंपरा की पहचान घूमर के ये बोल..म्हानें परदेसां मत दीजो ए मां.., म्हानें राठौड़ों रे घरे भल दीजो ए मां..म्हने राठौड़ों री बोली प्यारी लागे ऐ मां.घूमर रमवा मैं चाली..।
यह नजारा था रविवार की शाम जयनारायण व्यास स्मृति भवन में जोधपुर स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक संध्या का जिसमें स्थानीय कलाकारों ने मारवाड़ की लोक संस्कृति का प्रदर्शन करने में कोई कमी नहीं रखी।
राठौड़ राजा राव जोधा के साढ़े पांच शताब्दी पूर्व बसाए जोधपुर की स्थापना की पूर्व संध्या पर रविवार शाम जिला प्रशासन, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी तथा पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस रंगारंग शाम का आग़ाज कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर नरेशपाल गंगवार, अकादमी अध्यक्ष मदन मोहन माथुर तथा उप निदेशक, पर्यटन उमरावसिंह राठौड़ के दीप प्रज्ज्वलन के साथ हआ।
बादीलो चितारे म्हानें आवे हिचकी
देश विदेश में राजस्थानी लोक संगीत का परचम फहराने वाले लंगा बंधुओं में से कोहीनूर लंगा एंड पार्टी ने कार्यक्रम की शुरुआत मशहूर राजस्थानी गीत हिचकी के साथ की। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए नन्ही मुन्नी अदिति ने राजस्थानी नृत्य की झलक प्रस्तुत की तो बुंदू खां लंगा ने गोरबंद नखरालो सुनाया।
बंद हुई वक्त की आवाज
कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण के रूप में मोनालिसा संस्थान की गायिका रीतिका पांडे ने कराओके साउंड ट्रेक पर वक्त फिल्म के गाने पर आशा भोंसले की तर्ज पर मुरकियां लेते हुए गीत आगे भी जाने न तूं की प्रस्तुति शुरू की, लेकिन कार्यक्रम में प्रयोग में लिए गए कैसेट डैक में कराओके कैसेट के फंस जाने से साउंड ट्रेक बीच में ही बंद हो गया तथा रीतिका को बीच में ही गाना छोड़ कर जाना पड़ा। मस्ती भरे माहौल में चल रहे गीत के अचानक बंद होजाने से दर्शकों सहित मुख्य अतिथि गंगवार भी उखड़ गए व कार्यक्रम बीच में ही छोड़ कर रवाना हो गए।
जयश्री ने जमाई जाजम
लगातार डैक पर कैसेट के आगे पीछे होते व्यवधान से बिगड़े माहौल को नन्ही मूक बधिर बालिका जयश्री बिस्सा ने अपने शानदार नृत्य प्रदर्शन से फिर से जमाया। सुश्री बिस्सा ने पिया तोसे नैना लागे गीत पर धमाकेदार नृत्य करते हुए दर्शकों से दाद प्राप्त की।
घूमर से हुए अभिभूत
जयश्री के बाद दुर्गा परिहार ने अपने शानदार राजस्थानी वस्त्र विन्यास तथा सधे हुए कदमों से लूर लेते हुए घूमर नृत्य का शानदार प्रदर्शन किया जबकि स्वाति सांखला ने चमकदार लहंगा व ओढ़नी ओढ़े छैल भंवर रो कांगसियो गीत की प्रस्तुत करते हुए दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर किया।
बैंड की मधुर स्वर लहरी से गूंज उठा पार्क
स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर अपराह्न् उम्मेद उद्यान में संस्थागत व निजी क्षेत्र के सात बैंड समूहों ने सुमधुर संगीतमय प्रस्तुतियां दी। बैंड वादन प्रतियोगिता में मेहरानगढ़ बैंड प्रथम, मुन्ना दरबार बैंड द्वितीय तथा सीमा सुरक्षाबल बैंड तीसरे स्थान पर रहा।
प्रथम को 5100 रुपए, द्वितीय को 3100 रुपए तथा तीसरे स्थान पर रहे बैंड को 2100 रुपए का पुरस्कार मिलेगा।निर्णायक कर्नल उम्मेदसिंह, बीएसएफ के पूर्व डीआईजी मनोहरसिंह तथा प्रोटोकाल अधिकारी मानाराम पटेल थे। पर्यटन उपनिदेशक उमरावसिंह राठौड़ ने स्वागत किया। संचालन प्रमोद सिंघल ने किया।