कोटा. रविवार को कोटड़ी चौराहे के आगे बरकत उद्यान के निकट अज्ञात वाहन ने युवक को टक्कर मार दी। उसने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस के अनुसार आरबीआई की चेस्ट शाखा में तैनात हैडकांस्टेबल कृष्णगोपाल मेघवाल का 28 वर्षीय पुत्र ज्ञानचंद रविवार शाम को पुरोहितजी की टापरी, स्टेशन स्थित घर से बाइक लेकर कोटड़ी चौराहे की तरफ जा रहा था। बरकत उद्यान के निकट अज्ञात वाहन ने पीछे से उसे टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही ज्ञानचंद बाइक से उछला और उद्यान की दीवार से जा टकराया, जिससे सिर पर गंभीर चोट आई।
सूचना मिलने पर गश्त कर रही पुलिस की फ्लाइंग तत्काल मौके पर पहुंच गई। फ्लाइंग इंचार्ज एएसआई मोहम्मद हनीफ ने जख्मी ज्ञानचंद को राजकीय महाराव भीमसिंह चिकित्सालय पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नयापुरा थाने के एसआई जसवंतसिंह ने बताया कि अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। लोगों से पूछताछ के आधार पर वाहन का पता लगाया जा रहा है।
मुख्य मार्ग पर दुर्घटना, कोई गवाह नहीं
जिस स्थान पर दुर्घटना हुई वहां हमेशा ट्रैफिक का रश रहता है। पास ही नाग-नागिन मंदिर पर दो जवान तैनात थे। दुर्भाग्यजनक पहलू यह है कि पुलिस को कोई यह बताने वाला नहीं मिला कि टक्कर किस वाहन ने मारी। जिससे पूछा उसने एक ही बात दोहराई, हमने तो उसे सड़क पर पड़े हुए देखा था।
एक दिन पहले ही आया था
कृष्णगोपाल ने बताया कि ज्ञानचंद नोएडा में सीको कंपनी में नौकरी करता था। वह कंपनी के कार्य से गुना-बीना गया था। रविवार की छुट्टी होने के कारण वो शनिवार की रात कोटा आ गया था। रात को कृष्णगोपाल, ज्ञानचंद व उसके छोटे भाई ने साथ-साथ मैच देखा और गपशप करते रहे। किसी को क्या पता था कि ये रात फिर नहीं आएगी।
मोबाइल से शिनाख्त
अस्पताल पहुंचाने के बाद पुलिस ने उसकी शिनाख्त करने के लिए जेब टटोली तो मोबाइल फोन मिला। जिसमें लास्ट डायलिंग पर फोन किया जो उसके दोस्त नरेन्द्र का था। नरेन्द्र से बात कर उसे अस्पताल बुलाया तो उसने आकर युवक की शिनाख्त अपने दोस्त ज्ञानचंद के रूप में की। हैडकांस्टेबल कृष्णगोपाल के बारे में पता चला तो उसे सूचना दी गई।
मासूम ने खोया पिता का साया
दो महीने पहले ही ज्ञानचंद ने अपनी बेटी का पहला जन्मदिन मनाया था। अभी उसने बेटी के मुंह से ‘पापा’ शब्द भी नहीं सुना था कि लापरवाह वाहन चालक ने मासूम के सिर से पिता का साया छीन लिया।
ज्ञानचंद का विवाह दो साल पहले हुआ था और करीब सवा साल की उसकी एक बेटी है। दुर्घटना की सूचना जब उसके घर पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। उसकी पत्नी, मां व बहन का रो-रोकर बुरा हाल था। हैडकांस्टेबल कृष्ण गोपाल कभी उन्हें ढांढस बंधाता तो कभी खुद फूट-फूटकर रोने लगता।