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बंगाल : कद्दावर सांसद वर्सेस बेबाक डीआईजी

नंदीग्राम. नंदीग्राम में रविवार का दिन हलचल भरा रहा। सीआरपीएफ डीआईजी आलोक राज के खिलाफ पहले दो महिलाओं ने बदसलूकी का आरोप लगाया और उसके बाद तमलुक के सांसद से राज की अच्छी खासी झड़प हो गई जो अब एक बड़ा विवाद बन चुकी है।

दरअसल, नंदीग्राम में कल पंचायत चुनाव की वजह से हिंसा संभावित थी, इसी के मद्देनजर सुरक्षा के भारी इंतजाम थे। सीपीएम कार्यकर्ताओं ने बड़े ही जोर-शोर से अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए काफिले निकाले। पुलिस ने भी गरमागरमी और वाकयुद्ध पर कोई आपत्ति नहीं ली।

लेकिन सुबह करीब साढ़े नौ बजे तमलुक के सांसद और सीपीएम के कद्दावर नेता लक्ष्मण सेठ ने राज के मोबाइल पर फोन किया और राज ने मीडिया के सामने मोबाइल का स्पीकर चालू कर दिया।

फोन पर हुई बातचीत :
सेठ ने राज से कहा कि वे आगे कार्रवाई न करें और कैंप में ही रुकें लेकिन राज ने कहा कि उनके पास ऐसे कोई आदेश नहीं हैं और वे कैंप में न रुकते हुए आगे की कार्रवाई करने जा रहे हैं। एक सांसद होने के नाते सेठ पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए राज ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें आदेश देने का सेठ को कोई हक नहीं है।

आगे का घटनाक्रम :
शाम को करीब पौने छह बजे राज्य चुनाव आयोग के सचिव एसएन रॉय चौधरी ने राज का खुलकर समर्थन करते हुए साफ तौर पर कह दिया कि एक सांसद या विधायक को कोई हक नहीं है कि वह सुरक्षा अधिकारियों को किसी भी तरह के निर्देश दें।

मामले ने पकड़ा तूल :
अलसुबह राज पर दो महिलाओं द्वारा बदसलूकी के आरोप लग चुके थे जिन्हें वे खारिज भी कर चुके थे फिर दोपहर में गरुपारा के ग्रामीणों और पुलिस के साथ सीआरपीएफ की भिड़ंत हो गई। इस बीच घायल एक महिला कॉंस्टेबल ने कहा कि नंदीग्राम ओसी देबाशीष चक्रवर्ती ने उनके साथ बदसलूकी की लेकिन चक्रवर्ती ने यह आरोप सीआरपीएफ के कर्मचारियों के माथे डाल दिया।

और अब :
इस पूरी हलचल के बाद सोमवार को सेठ ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने राज को फोन इसलिया किया था क्योंकि वे जन प्रतिनिधि हैं और जनहित उनका कर्तव्य है। सेठ ने आरोप लगाया कि राज उनके समर्थकों के खिलाफ जबरन मारपीट कर रहे थे इसलिए उन्हें रोकने की कोशिश की गई। सेठ ने कहा कि वे सरकार के आदेश ही फोन पर दे रहे थे लेकिन राज ने उनकी छवि बिगाड़ने के लिए वैसा व्यवहार किया।

आखिरकार जांच :
मामले को उलझते और तूल पकड़ते देख राज्य सरकार के गृह विभाग ने एक उच्च स्तरीय जांच की घोषणा कर दी है जो पूरी हलचल और घटनाक्रम का ब्यौरा देगी। इसके बाद निर्णय लिया जाएगा कि गलत कौन था सांसद या डीआईजी।

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