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बाजार में लिलावली की कमी के संकेत

मुंबई.पिछले सप्ताह शेयर में मौजूदा परिस्थियों के पुर्न मूल्यांकन के मद्देनजर स्थिरता के संकेत मिले। पिछले सप्ताह सकारात्मक या नकारात्मक परिस्थियों का बाजार पर कुछ खास असर नहीं दिखने को मिला। बाजार धीरे-धीरे मजबूती का रुख अपना रहा है लेकिन जरुरी नहीं है कि बाजार के एकीकरण प्रावस्था में कीमतों के विषम उतार-चढ़ाव भी एकसमान हो।

पिछले कुछ समय में आर्थिक विकास और कार्पोरेट वित्तीय नजीजों के अच्छे परिणाम का प्रतिकूल असर शेयर बाजार में देखने को मिला है लेकिन साथ ही बाजार ने नाकात्मक संकेतों पर घबराहट नहीं दिखाकर अच्छे संकेत दिए हैं। इसका प्रभाव आने वाले मध्यावधि और लंबे समय में कार्पोरेट के लाभ पर देखने को मिल सकता है।

फिलहाल कार्पोरेट की आय में 5 से 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है लेकिन इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा कि गतिशील परिस्थितियों में इस आकंडे में समय-समय पर संशोधन देखने को मिले। फिलहाल इस बात पर तो आम राय बन चुकी पहले और दूसरे तिमाही में परिचालन लाभ गहरे दबाव में रहेगा। निवेश विशेषज्ञ भी पहले और दूसरे तिमाही के परे तीसरे और चौथे तिमाही का मूल्यांकन कर रहे हैं।

जहां तक निवेशकों की बात है कि उन्हें लगता है कि 2009-10 में बाजार उनके आशा के अनुरुप अच्छा परिणाम देगा। उनका मानना है कि अगले दो सालों का पहला और दूसरा तिमाही भी उतना बुरा नहीं होगा जितना की निराशावादी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। बाजार की मौजूदा स्थिती ने सभी को चहारदीवारी में बैठने के लिए मजबूर कर दिया है। लेकिन जिन्हें भी भारत और यहां के उभरते बाजार के सुनहरे कल पर भरोसा है उन्हें अब आगे बढ़कर बाजार में हाथ अजमाने में हिचक नहीं करनी चाहिए लेकिन ऐसे बहुत से कम लोग इस नीति को अपनाने के लिए तैयार हैं क्योंकि किसी को भी नहीं मालूम कि बाजार में अनिश्चितता का दौर कब तक बरकरार रहेगा। विदेशी निवेशकों अभी भी जोखिम उड़ाकर भारतीय शेयरों में निवेश कर रहे है। अगर किसी को लगता है कि विकास और मुनाफे प्रतिकूल स्थितियां पैदा करती हैं तो यही बात देशी निवेशकों पर भी लागू होता है। जिसे भी बाजार के सुनरहे भविष्य का भरोसा है उन्हें मालूम है कि मौजूदा वित्त वर्ष के पहले दो तिमाही में उन्हें घाटा भी सहना पड़ सकता है। कड़वा सच

महंगाई को काबू में करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जाने वाले उपायों का भी सीधा प्रभाव कोर्पोरेट के मुनाफे और लाभ पर पड़ेगा। अगले कुछ तिमाही में कच्चे तेल की कीमत और रुपए की तुलना के डॉलर की स्थिती भी कोर्पोरेट जगत के लिए काफी महत्वपूर्ण होगी। लेकिन अंत में अल्पावधि में निवेशकों को बाजार के कड़वे सच को अपना कर ही आगे बढ़ना होगा। इस हफ्ते बाजार में लिलावली पर नाकरात्मक असर देखने को मिल सकता है। पहले तिमाही के पूरे नतीजें सामने आने तक निवेशकों की नजर कॉर्पोरेट जगत पर टीकी रहेगी और प्राइजिंग भी पहले से ज्यादा आक्रामक हो सकता है। निवेशक का झुकाव स्टॉक विशेष पर होगा।





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