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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. बीएमडब्ल्यू या मर्सडीज कार के निर्माता जर्मनी में बैठ कर विश्व के हर हिस्से में मौजूद अपनी प्रोडेक्शन यूनिटों को ऑन लाइन ऑपरेट करते हैं। अपनी कारों का स्टैंडर्ड और क्वालिटी बनाए रखने के अलावा प्रोडेक्शन की हर खामी को सेकंड्स में दूर किया जा सकता है। ऐसा सिर्फ यह कंपनियां ही नहीं बल्कि यूरोप और अमेरिका की कई बड़ी कंपनिया कर रही हैं।
अपने प्रोडक्ट के ब्लू प्रिंट्स कंपनी मुख्यालय में बैठ कर ब्रॉडबैंड और इंटरनेट की मदद से हजारों मील दूर विदेशों में सभी यूनिटों को ऑपरेट करने की तकनीक वेब मैन्यूफैक्चरिंग कहलाती है। भारतीय कंपनियों ने अभी इस तकनीक को नहीं अपनाया है। सीएसएआईओ में रविवार को पहुंचे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर ट्रेनिंग एंड रिसर्च (एनआईटीटीटीआर) चंडीगढ़ के निदेशक डॉ एससी लरोइया ने तकनीक के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी हस्तांतरण के लिए वेब का इस्तेमाल विकसित देशों के निर्माता सफलता पूर्वक कर रहे हैं। कंपनी द्वारा तैयार किया प्रोटोटाइप कंपनीज ऑन लाइन अपने विदेशों में फैले प्रोडेक्शन यूनिटों को ट्रांसफर सकती है। बीएमडब्ल्यू जैसे कार निर्माताओं के टेक्निकल हेड मुख्यालय में बैठ कर सभी देशों में चल रहे निर्माण को संभाल रहे हैं।
क्वालिटी रहती है मेनटेन: प्रोडक्शन यूनिट को ऑन लाइन ऑपरेट करने से हर यूनिट में बनने वाले प्रोडक्ट की क्वालिटी एक सी रहती है। मशीनों के निर्माण से लेकर उनके टेस्ट जब एक ही जगह से ऑपरेट होते हैं तो प्रोडक्ट की क्वालिटी बिगड़ती नहीं।
नेसले जैसी कंपनी भारत में बनने वाले अपने प्रोडक्ट्स को वहीं से ऑपरेट करती है। ऐसे में हर देश में बनने वाला उनका प्रोडक्ट एक ही स्टैंडर्ड का होता है। वेब मैन्यूफैक्चरिंग से खाद्य उत्पादों के प्रोडक्शन के लिए जरूरी तापमान और rाूमिडीटी लेवल तक मेनटेन किया जा सकता है।
रिसर्च वर्क ओपन
केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) में रविवार को नेशनल टेक्नोलॉजी-डे मनाया गया। संस्थान में स्टूडेंट्स के लिए लैब और रिसर्च वर्क ओपन किया गया। विशेषज्ञों ने रोल ऑफ वेब इन मैन्यूफैक्चरिंग विषय पर विचार रखे। संस्थान के निदेशक पवन कपूर ने समारोह का उद्घाटन किया।