नई दिल्ली. मध्यम दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि तीन के सफल परीक्षणों से उत्साहित भारत जल्द ही पांच हजार किलोमीटर लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा है। अग्नि मिसाइल की अग्रिम श्रृंखला का परीक्षण देश को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल कर देगा जिनके पास लंबी दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल क्षमता है।
इस प्रकार की मिसाइल के परीक्षण की योजना प्रक्रिया के अंतिम चरण में होने का संकेत देते हुए अग्नि तीन मिसाइल के परियोजना निदेशक अविनाश चंद्र ने बताया कि वैज्ञानिक परीक्षण के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं जो इस वर्ष के अंत तक कभी भी हो सकता है।
लंबी दूरी की अग्नि मिसाइल के साथ ही भारत अपनी विशेष नौसेना मिसाइल का भावी परीक्षण भी करेगा जिसे डीआरडीओ वैज्ञानिक पनडुब्बी से प्रक्षेपित होने वाली बैलेस्टिक मिसाइल के तौर पर देख रहा है। इसके साथ ही इंटरसेप्टर मिसाइल का सितंबर-अक्टूबर तक दूसरा परीक्षण किया जाएगा।
नौसेना की विशेष मिसाइल के बारे में डीआरडीओ के महानिदेशक एम नटराजन ने कहा कि उनके वैज्ञानिक इस परियोजना में पूरी तरह से तल्लीन हैं लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी कब तैयार होगी।
नटराजन ने कहा दी एडवांस टेक्नोलॉजी व्हीकल के रूप में जानी जाने वाली परमाणु पनडुब्बी परियोजना मेरा प्रोजेक्ट नहीं है। उनसे सवाल किया गया था कि क्या डीआरडीओ पनडुब्बी को तैयार करने की वर्ष 2009 की समय सीमा पर खरा उतरेगा। इंटरसेप्टर मिसाइल के संबंध में परियोजना निदेशक वी के सारस्वत ने कहा कि इससे भारत को किसी भी बाहरी मिसाइल को बीच में भेदने की क्षमता हासिल होगी।
इस प्रकार की मिसाइल के विकास से हथियारों की दौड़ शुरू होने संबंधी सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि इससे भारत का रक्षा कवच मजबूत होगा। उन्होंने कहा हमारे जखीरे में इस प्रकार की मिसाइल के शामिल होने से हमें अपने प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके विपरीत हम पर कुछ भी दागने से पूर्व उन्हें दो बार सोचना पड़ेगा कि ऐसी किसी भी चीज को मार गिराया जा सकता है।