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International International इस्लामाबाद.
राष्ट्रपति मुशर्रफ के खिलाफ एकजुट हुआ पाकिस्तान का विपक्ष सत्ता में आने के बाद से जजों की बहाली के मुद्दे पर एकराय नहीं हो सका है। दूसरी बार दी गई समयसीमा के निकल जाने के बाद सोमवार को भारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच पीएमएल-एन के नेता नवाज शरीफ ने सरकार से अलग होने का एलान कर दिया। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि गठबंधन सरकार को समर्थन जारी रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी के मंत्री मंगलवार को प्रधानमंत्री सैयद यूसुफ रजा गिलानी को अपने इस्तीफे सौंप देंगे। गिलानी के 24 सदस्यीय मंत्रिमंडल में पीएमएल-एन के नौ सदस्य हैं।
जरदारी की चेतावनी : सोमवार सुबह से जारी समर्थन वापसी की अटकलों के बीच जरदारी ने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा हुआ तो पंजाब में शरीफ की पार्टी की सरकार भी गिर सकती है।
लंदन में अमेरिकी मध्यस्थता और दुबई में शरीफ-जरदारी वार्ता विफल होने के बाद से ऐसी अटकलें थीं कि शरीफ की पार्टी गिलानी सरकार से समर्थन वापस ले लेगी। ऐसे हालत में नए सिरे से चुनाव करवाने पड़ते, जो शायद किसी को मंजूर नहीं है। शरीफ और उनके भाई शाहबाज सोमवार को ही लंदन से लौटे हैं।
अमेरिकी विदेश उपमंत्री रिचर्ड बाउचर की मध्यस्थता में पीपीपी के सह अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी तथा पीएमएल-एन के नेता नवाज शरीफ के बीच तीन दिन तक चली वार्ता रविवार को अचानक बेनतीजा समाप्त हो गई थी।
गिलानी को बता दिया था : प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार, वरिष्ठ पीएमएल-एन के नेता और खाद्य मंत्री चौधरी निसार अली खान ने सोमवार सुबह प्रधानमंत्री गिलानी से भेंट कर यह आश्वासन दिया था कि पार्टी नेतृत्व चाहे जो फैसला ले, गठबंधन सरकार को समर्थन जारी रखा जाएगा।
पीपीपी जिम्मेदार : पीएमएल-एन ने गठबंधन सरकार बनते ही जजों की बहाली के लिए 30 दिन का समय तय किया था, जिसके बीत जाने पर 30 अप्रैल को समय सीमा 12 दिन और बढ़ाई गई थी। इसके साथ यह धमकी भी दी गई थी कि 12 मई तक जजों की बहाली नहीं हुई तो सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार से पीएमएल-एन बाहर हो जाएगा। पीएमएल-एन के प्रवक्ता सिद्दीक उल फारूक ने मौजूदा हालात के लिए पीपीपी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, ‘हमारी साख दांव पर है। लोग हमें धोखेबाज कहेंगे।’
आगे क्या होगा:
- शरीफ की पार्टी से जुड़े सभी मंत्री प्रधानमंत्री को अपने इस्तीफे सौंपेंगे।
- पीएमएल-एन सत्तारूढ़ गठबंधन में बनी रहेगी, लेकिन सरकार के फैसलों में हिस्सा नहीं लेगी।
- जजों की बहाली जल्द न हुई तो समर्थन वापसी पर विचार भी हो सकता है।
मसले पर एक नजर:
- नवंबर 2007 : मुशर्रफ ने इमरजेंसी लगाने के साथ ही असहयोग करने वाले 90 जजों को बर्खास्त कर दिया था।
- पीएमएल-एन इन्हें संसदीय प्रस्ताव और प्रधानमंत्री के आदेश से बहाल करवाना चाहती है। यह इमरजेंसी में नियुक्त जजों की बर्खास्तगी भी चाहती है।
- पीपीपी बाद में नियुक्त जजों को बर्खास्त नहीं करना चाहती, ताकि कहीं वे संकट खड़ा न कर दें।
- पीपीपी नेता जरदारी को डर है कि मुशर्रफ ने उनके और बेनजीर के खिलाफ भ्रष्टाचार के जो मामले खत्म कर दिए हैं, वे इन जजों की बहाली से कहीं फिर न खुल जाएं।
- जजों की बहाली से राष्ट्रपति मुशर्रफ के खिलाफ मामले भी फिर खुल सकते हैं।
- जरदारी और मुशर्रफ दोनों नहीं चाहते कि सुप्रीम कोर्ट के बर्खास्त चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी को बहाल किया जाए। चौधरी ने अक्टूबर में बेनजीर-जरदारी को दी गई माफी को चुनौती दी थी।
- शरीफ चाहते हैं कि जजों की बहाली दो नवंबर 2007 की स्थिति में हो।