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जरूरी है टीम के सांचे में ढलना

विकास मंत्र. जब टीम के सदस्य एक-दूसरे की परवाह करते हुए विकास करते हैं और किसी साझे लक्ष्य के लिए काम करते हैं, तो वे एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जान लेते हैं। वे एक-दूसरे की शक्तियों की सराहना करने लगते हैं और एक-दूसरे की कमजोरियों के बारे में भी जान जाते हैं। वे हर खिलाड़ी के अद्भुत गुणों को पहचानने लगते हैं और उनकी सराहना करने लगते हैं। इससे टीम के सांचे का विकास होता है।

टीम का सांचा कैसा होगा यह कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें सिर्फ विशेष गुण वाले लोगों का होना ही काफी नहीं होता। हम सबने शायद देखा होगा कि कई टीमें योग्य खिलाड़ियों से भरी थीं, उन्हें मिलकर अच्छा खेलना चाहिए था, परंतु ऐसा नहीं हो पाया। उनमें योग्यता तो थी, परंतु उनकी कैमिस्टर्र्ी सही नहीं थी।

टीम के अच्छे सांचे के लिए पार्टनरशिप का नजरिया बहुत जरूरी है। टीम के हर सदस्य को हर खिलाड़ी का सम्मान करना चाहिए। उन सबमें टीम के प्रति योगदान देने की इच्छा होनी चाहिए और उन्हें हर खिलाड़ी से योगदान की अपेक्षा भी रखनी चाहिए। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें एक-दूसरे पर भरोसा करना सीखना चाहिए, तभी वे एक-दूसरे पर विश्वास कर पाएंगे।

इसमें वे एक-दूसरे की कमजोरियों का लाभ उठाने की बजाय उसकी भरपाई करेंगे। इसी वजह से टीम की एक सदस्य दूसरे से कह सकता है, ‘तुम जाओ यह काम करो, क्योंकि तुम इस काम को मुझसे बेहतर तरीके से कर सकते हो।’ यह कहते समय उसे जरा भी संकोच या शोषण का संदेह नहीं होगा। विश्वास के कारण टीम के सदस्य एक इकाई के रूप में काम करते हैं। इसी की बदौलत वे मिलकर महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल करते हैं। जब खिलाड़ी एक-दूसरे को जान जाते हैं, एक-दूसरे पर विश्वास करने लगते हैं और एक सांचे में ढल जाते हैं, तो टीम का व्यक्तित्व उभरकर सामने आता है।





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