जयपुर. छवि सुधार के लिए भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे मंत्रियों और भाजपा नेताओं पर कार्रवाई के संकेत से सरकार और भाजपा में खलबली मची हुई है। जमीनों से जुड़े मंत्री डरे-सहमे नजर आ रहे हैं। इनमें से कुछ जो कुछ दिन पहले तक मुख्यमंत्री के साथ-साथ चलते थे अब स्वत: ही दूरियां बनाए हुए है। मुख्यमंत्री ने अन्य मंत्रियों पर कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर रविवार को कहा था कि देखते रहिए.. भाजपा में चर्चा है कि इस देखते रहिए का संकेत क्या ये है कि जमीनों के आरोपों में घिरे सभी मंत्रियों को घेरा जाएगा?
मुख्यमंत्री ने सोमवार को फिर संकेत दिए कि सरकार में बहुत विकास के काम चल रहे हैं इनमें भ्रष्टाचार उन्मूलन भी एक है। इससे पहले भी कह चुकी हैं कि उनके पास सबकी बैलेंसशीट है। वन राज्यमंत्री प्रतापसिंह सिंघवी की बेनामी जमीनों की अवाप्ति और चिह्न्ीकरण तथा हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष अजयपाल सिंह की जमीनों पर कार्रवाई को इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अजयपाल और सिंघवी को फिलहाल कुछ राहत दी गई लगती है, लेकिन आगे क्या होगा, यह मुख्यमंत्री पर ही निर्भर है।
जमीनों की तलाश जारी : प्रताप सिंह सिंघवी और हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष अजयपाल से जुड़ी जमीनों की तलाश जोर-शोर से चल रही है। सोमवार को हाउसिंग बोर्ड ने कोटा के रंगबाड़ी, नयापुरा सहित चार गांवों की कई बीघा जमीन की अवाप्ति का प्रस्ताव नगरीय विकास विभाग को भेजा है।
इन पर लगे हैं जमीनों से जुड़े आरोप
गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया
उदयपुर में हाईवे के निकट जमीन की रजिस्ट्री कम दर पर कराने का मामला।
खाद्य मंत्री घनश्याम तिवाड़ी
सीकर में पहाड़ के पास नदी पेटे की 700 बीघा जमीन का विवाद।
वन राज्यमंत्री प्रतापसिंह सिंघवी
कोटा, बारां, जयपुर सहित कई जगहों पर करीब एक हजार करोड़ की बेनामी संपत्तियां बनाने का आरोप।
हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष अजयपाल सिंह
राजस्थान में विभिन्न जगहों पर जमीनें खरीदकर उनके पास हाउसिंग बोर्ड की आवासीय योजनाएं बनाने का आरोप। सरकार ने माई हवेली प्रोजेक्ट की जमीन अवाप्ति में ले ली है। कुछ और प्रोजेक्ट्स पर लटकी तलवार।
खान मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे
बेटे की निरस्तशुदा खान बहाल करके दूसरे को ट्रांसफर करने का आरोप।
खान राज्यमंत्री खेमाराम मेघवाल
परिजनों और रिश्तेदारों को बड़ी संख्या में खानों का आवंटन कराने का आरोप।
सिंचाई राज्यमंत्री सुरेन्द्रसिंह राठौड़
पद का दुरुपयोग कर रिश्तेदारों के नाम खान आवंटित कराने का आरोप।
जल संसाधन मंत्री सांवरलाल जाट
पाइप खरीद में अनियमितता का आरोप।
इनके अलावा राजेन्द्र सिंह राठौड़, डॉ. दिगंबरसिंह, प्रभुलाल सैनी, रामनारायण डूडी और गजेन्द्रसिंह खींवसर (सभी मंत्री) पर भी विधानसभा के भीतर और बाहर आरोप लगते रहे हैं, लेकिन जमीनों के नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के हैं।