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भाजपा विधायकों ने बनाया समर्थन वापसी का दबाव

चंडीगढ़/जालंधरजिला परिषद व पंचायत समितियों के चुनावों में अकालियों की धक्केशाही से गुस्साई भाजपा पर उसके विधायकों ने समर्थन वापसी का जबरदस्त दबाव बना दिया है। इसे देखते हुए पार्टी के पंजाब मामलों के प्रभारी बलबीर पुंज मंगलवार को चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं। पुंज ने माना कि उन पर विधायकों का समर्थन वापसी का दबाव है। पार्टी ने अपने कोर ग्रुप और विधायकों व सांसदों की एक बैठक बुलाई है।

सभी विकल्प खुले : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र भंडारी ने भी साफ किया है कि समर्थन वापसी सहित सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के अस्तित्व से अधिक उन्हें अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान प्यारा है। बलबीर पुंज ने भास्कर को फोन पर बताया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था बदतर हो चुकी है।

भंडारी ने कहा है कि भाजपा बाहुबल के सहारे चुनाव जीतने का होशा विरोध करती रही है। इन चुनावों में अकाली विधायकों और कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले किए है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पुलिस ने नहीं सुनी कालिया की गुहार: स्थानीय निकाय मंत्री मनोरंजन कालिया ने कहा, कल उन्होंने अकालियों की धक्केशाही रोकने के लिए कई बड़े पुलिस अफसरों को फोन किए, पर किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। भाजपा अब और चुप नहीं बैठेगी।

बादल की भाजपा आलाकमान से बात : मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी को फोन करके मामले को ज्यादा तूल न देने को कहा है। अपनी सरकार को बचाने के लिए खुद मुख्यमंत्री सक्रिय हो गए हैं।

क्या हैं भाजपा के पास विकल्प: भाजपा के पास तीन विकल्प हैं। पहला, सरकार से समर्थन वापसी का पत्र गवर्नर को दे। इससे बादल सरकार अल्पमत में आ जाएगी। दूसरा, भाजपा सरकार को बाहर से मुद्दों पर आधारित समर्थन देने की घोषणा करे और उसके सभी मंत्री और संसदीय सचिव इस्तीफा दे दें। डिप्टी स्पीकर सतपाल गोसरई ऐसा कह चुके हैं। तीसरा, सरकार में रह कर दबाव के सहारे अपनी शर्तें मनवाए।

क्यों है भाजपा नाराज: इन चुनावों में सीटों को लेकर विवाद तो मात्र एक बहाना है। वास्तव में इस लड़ाई के कई और कारण हैं। जैसे-

>> अफसरशाही का भाजपा मंत्रियों की न सुनना >> नीतिगत फैसले लेते समय भाजपा मंत्रियों की अनदेखी >> सुखबीर बादल का भाजपा विरोधियों को प्रोत्साहित करना >> जिला स्तर पर भाजपा नेताओं की सुनवाई न होना >> चुनावों से पहले निगमों और बोर्डे के चेयरमैन लगाने का मामला लटका देना।





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