नई दिल्ली महंगाई के चलते स्कूलों में मिड डे मील योजना के लिए अधिक धनराशि आवंटित करने की मांग कर रहे राज्यों के सामने अब अनाज का संकट भी गहरा गया है। राजस्थान, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों द्वारा मध्याह्न् भोजन योजना के लिए अनाज आवंटित नहीं किए जाने की शिकायत के बाद केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री अजरुन सिंह ने कृषि व खाद्य आपूर्ति मंत्री शरद पवार को पत्र लिखा है। पत्र में आग्रह किया गया है कि मिड डे मील योजना का अनाज किसी भी हालत में न रोका जाए।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ दिन पहले लिखे गए इस पत्र में मानव संसाधन मंत्री ने पवार से कहा है कि अनाज न मिलने के कारण बच्चों को स्कूलों में मध्याह्न् भोजन देने की योजना पर गंभीर संकट पैदा हो सकता है। हालांकि मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि पवार ने अभी तक इस पत्र का जवाब नहीं दिया है।
आर्थिक संसाधनों का झगड़ा :
बढ़ती महंगाई के अनुपात में भारतीय खाद्य निगम को मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से समुचित धन नहीं दिए जाने के कारण निगम ने अनाज का आवंटन रोक रखा है। एक अधिकारी ने बताया कि बकाया राशि लंबित होने के कारण विवाद उत्पन्न हुआ है।
मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारी यह भी दावा कर रहे हैं कि खाद्य निगम को धन आवंटित कर दिया गया है, लेकिन वे ज्यादा पैसा मांग रहे हैं।
कितना चाहिए अनाज :
मिड डे मील के लिए एक साल में सभी राज्यों को मिलाकर कुल तीन लाख मीट्रिक टन अनाज की जरूरत होती है। इसमें 70 फीसदी चावल और 30 फीसदी गेहूं भारतीय खाद्य निगम से लिया जाता है। विगत वर्र्षो में यह अनाज राज्यों को एकमुश्त मिलता रहा है, लेकिन इस बार मानव संसाधन मंत्रालय के दबाव के बावजूद खाद्य मंत्रालय इसे तीन माह के लिए ही देने पर राजी हुआ है।