करनालअब जाड़े में चिंटू को स्कूल जाने से पहले ठंडे पानी से नहीं नहाना पड़ेगा और न ही गर्मी में मम्मी गर्म पानी से कपड़े धोएगी। जब भी टूंटी खोलेंगे, ताजा पानी मिलेगा। आईएआरआई (करनाल) के वैज्ञानिक डॉ. आरएन यादव ने ऐसी तकनीक ईजाद की है, जिससे कड़ाके की ठंड में न तो पानी बर्फ जैसा ठंडा होगा और न ही भीषण गर्मी में उबलेगा। तकनीक की खासियत है कि 0-47 डिग्री तापमान पर भी पानी सामान्य रहेगा।
क्या है तकनीक:
तीन इंच की दीवार बनाकर तीन इंच की जगह छोड़कर इसके समानांतर एक और दीवार खड़ी की गई। खाली जगह में तूड़ी की राख डालकर कर इसे ढाला गया। दोनों ही मौसम में इसमें रखे पानी का परीक्षण किया गया। इसमें रखे पानी का तापमान दोनों ही मौसम में 20-25 सेंटीग्रेड तक रहा। यानी इसमें रखे पानी पर न तो कड़ाके की ठंड और न ही भीषण गर्मी का कोई प्रभाव पड़ा।
यानी बिजली भी बचेगी :
जाड़े में पानी गर्म करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे रोज 2-3 यूनिट बिजली की बचत होगी। पानी ताजा रहने से बीमारी से भी बचाव होगा।
टंकी बनाने में ढाई सर्ौ ईटें, एक बैग सीमेंट, तूड़ी की राख सहित एक मिस्त्री की दिहाड़ी। इसके निर्माण पर 700 रुपए का खर्च आता है। यह 20 वर्र्षो तक कारगर रहेगा।-
डॉ. आरएन यादव शोधकर्ता, आईएआरआई (करनाल)