HomeNewsRajasthanJodhpur Jodhpur

..और शर्मा को मिला बहादुरी का इनाम

जोधपुर. भारत-पाक युद्ध के दौरान बहादुरी दिखाने वाले शौर्य चक्र विजेता रेलवे के इंजन चालक श्रीकृष्ण शर्मा को आखिर 35 साल बाद न्याय मिल ही गया। हाईकोर्ट की लताड़ के बाद सरकार ने उन्हें जैसलमेर के मोहनगढ़ कमांड एरिया में 25 बीघा जमीन और पचास हजार रुपए का चेक बतौर इनाम दे दिया।

प्रशासन के दो प्रतिनिधियों ने मंगलवार को शर्मा के घर जाकर जमीन के कागजात और चेक दिया तो वे भावुक हो उठे । ज्ञात रहे चार दिन पूर्व ही आदेश के बावजूद शर्मा को जमीन व इनाम देने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने काफी गंभीरता से लिया और राजस्व सचिव ललित कोठारी व जिला कलेक्टर नरेशपाल गंगवार को नोटिस जारी किए थे।

पटवारी को जब बताया गया कि अब इनाम की राशि 75 हजार रुपए हो गई है तो उन्हें उच्चधिकारियों से फोन पर बात करने के बाद 25 हजार रुपए बाद में देने का वादा दिया।उन्हें मोहनगढ़ में 1 चक नंबर 47 पीडी नंबर 38/2 मुरब्बा आबंटित किया गया है।

हाईकोर्ट ने छह महीने पहले दिए थे आदेश

श्रीकृष्ण शर्मा ने सरकार से जमीन व नकद इनाम राशि पाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। पहली सुनवाई के दौरान गत 17 अक्टूबर,07 को न्यायाधीश गोविंद शर्मा ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए श्रीकृष्ण शर्मा को दो महीने में जमीन व नकद राशि देने के निर्देश दिए थे ।

कोर्ट के आदेश की पालना नहीं होने पर शर्मा ने कलेक्टर नरेशपाल से मिलने की कई बार कोशिश की,मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिर शर्मा ने अपने वकील अखिलेश राजपुरोहित के माध्यम से न्यायालय में फिर न्याय की गुहार करते हुए अवमानना याचिका दायर की। न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने इस मामले को काफी गंभीर मानते हुए राजस्व सचिव व कलेक्टर को नोटिस जारी कर तलब किया।

क्या था मामला

युद्ध के दौरान सीमा पार दुश्मन से मोर्चा लेने वाले सेना के जवानों के लिए आवश्यक सामान लेकर गडरा रोड से खोखरापार ट्रेन ले जानी थी। तब श्रीकृष्ण शर्मा ने साहस दिखाया औरगोलाबारी के बीच ट्रेन लेकर गए। उनकी इस वीरता के लिए 1972 में तत्कालीन राष्ट्रपति ने शौर्य चक्र प्रदान किया। राष्ट्रपति अवार्ड के बाद राजस्थान सरकार से मिलने वाली 25 बीघा सिंचित या 50 बीघा असिंचित जमीन नहीं मिली।

वर्ष 2003 तक उन्हें मात्र सौ रुपए वजीफा ही मिल पाया था। 26 जनवरी 2003 को भास्कर ने उनकी व्यथा को उजागर किया राज्य सरकार ने लंबे पत्र व्यवहार के बाद कोई सुनवाई नहीं की। इससे थक हार कर शर्मा ने जोधपुर में गत वर्ष आयोजित राज्य स्तरीय स्वाधीनता समारोह के दौरान शौर्य चक्र लौटाने का ऐलान कर दिया। इससे प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के पत्र के जवाब में 8 अगस्त को डिप्टी सैक्रेटरी ने राजस्थान वीरता पुरस्कार एक्ट 1946 की का हवाला देते हुए कहा कि शर्मा सिविलियन हैं,इसलिए वे जमीन व नकद पुरस्कार के हकदार नहीं हैं। इस बारे में शर्मा को अवगत करा दिया गया,मगर वे शौर्य चक्र लौटाने की जिद पर अड़े रहे। बाद में प्रशासन ने उन्हें जमीन देने का भरोसा दिया,मगर मुख्यमंत्री के जाते ही वादे से मुकर गए।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: