अजमेर. गरीबनवाज की दरगाह में बम विस्फोट की तफ्तीश सात महीने दो दिन में कई मोड़ों से गुजरने के बाद भी किसी नजीते तक नहीं पहुंच पाई है। गिरफ्तारी तो दूर अभियुक्तों की पहचान तक नहीं हो पाई है। इस बीच जांच में जुटी स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम के पास बताने के लिए कुछ खास नहीं है, इधर, मंगलवार को जयपुर में सीरियल बम धमाके कर दहशतगर्र्दो ने एसआईटी को फिर चुनौती दी है।
दरगाह परिसर में 11 अक्टूबर को हुए बम धमाका के बाद करीब एक महीने तक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम के अफसर पुलिस अन्वेषण भवन में पड़ाव डाले रहे, सीकर के खंडेला से शमीम, झारखंड से खुशीबुर्रहमान, दिल्ली से नासिर, उस्मानाबाद से इमरान शेख और मुरादाबाद से अतीक को हिरासत में लिया गया, लेकिन सबूत नहीं होने के कारण सभी को छोड़ना पड़ा। तफ्तीश से जुड़े अफसरों का तर्क है कि हैदराबाद बम विस्फोट प्रकरण की जांच देश की शीर्ष एजेंसी सीबीआई कर रही है, इसके बावजूद अपराधी अभी भी पकड़ से बाहर हैं।
तय नहीं तफ्तीश की दिशा
पुलिस ने घटना के तार हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट से जोड़ दिए। जांच इसी को केन्द्र में रखकर आगे बढ़ाई गई। विस्फोट में मारे एक व्यक्ति की शिनाख्त से इस जांच को बल मिला। मृतक हैदराबाद का निवासी था और अजमेर में रह रहा था। पुलिस मानकर चल रही थी कि हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी) ने स्थानीय व्यक्ति की मदद ली होगी।
हैदराबाद के विस्फोट में पाक समर्थित बांग्लादेशी संगठन हूजी का हाथ बताया गया था। जांच की दूसरी लीड जम्मू कश्मीर के पाक समर्थित आतंकी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जोड़ी गई। अजमेर में कश्मीरियों की धरपकड़ हुई। पुलिस ने मुस्लिमों के एक ऐसे फिरके को भी शक के दायरे में रखा, जो दरगाहों, मजारों पर यकीन नहीं करता। अजमेर में देवबंदियों की मस्जिदें तलाशी र्गई।
जांच दल ने बांग्लादेशियों से भी पूछताछ की। पुलिस ने लोकल अपराधियों को भी खंगाला। बहुचर्चित ब्लैकमेल कांड और तस्करी के अभियुक्त नफीस चिश्ती से भी जेल में पूछताछ की गई। मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन और आसपास के इलाकों से पकड़े गए प्रतिबंधित संगठन सिमी के नेताओं से भी एसआईटी दरगाह बम ब्लास्ट के मामले में पूछताछ कर चुकी है।