उदयपुर.
‘ब्रम्हा-विष्णु-सदाशिवाय..हर हर हर हर महादेवाय’, ‘ओ गुरुजी, तेरे नाम के सिवाय कुछ याद नहीं’, ‘राधे-राधे आधा मानस चन्द्रमा’.. जैसे एक के बाद एक भक्तिरस में घुली हुई भजनों की माला ने श्रोताओं को आनंद विभोर कर दिया। गर्मी की रात में मुक्ताकाशी रंगमंच पर गुरुचरणों का वंदन करते हुए तन-मन को जिस शीतलता व सुख की अनुभूति हुई, उसे वही लोग जान सके जो मौके पर मौजूद थे।
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर के 54वें जन्मोत्सव पर मंगलवार को भारतीय लोककला मंडल में आयोजित दिव्य सत्संग कार्यक्रम में सैकड़ों लोग उमड़े। भजनों की स्वर लहरियों में ऐसी तासीर थी कि जो जहां जैसे बैठा, उसी हाल में प्रभु भक्ति में रम गया।
व्यक्ति विकास केन्द्र के सहयोग से आयोजित भजन संध्या का आगाज शाम साढ़े सात बजे होना था लेकिन आगे जगह पाने की इच्छा में सात बजे से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। रात साढ़े नौ बजे तक भी लोग आते रहे। आर्ट आफ लिविंग के वरिष्ठ सदस्य व प्रशिक्षक प्रवीण मेहता ने गणपति वंदन के साथ भजन संध्या की शुरूआत की, उसके बाद ध्यान, ज्ञान व सत्संग की त्रिवेणी बह चली।
‘राम नाम बोलो, अल्लाह नाम बोलो, जीसस नाम बोलो’ के बोल के साथ श्रोता वर्ग भी झूमने लगा। सर्वधर्म समभाव का संदेश देते इस भजन ने विश्व के समस्त पंथों व धर्र्मो के लोगों को मानवता के धागे में पिरो दिया। ‘सांसों की माला में सिमरू तेरा नाम, ‘गोपाला गोपाला’,‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,हे नाथ नारायण वासुदेवा’ ‘शिवराजा महेश्वाराय’ सरीखे भजनों पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर संगत की। एक के बाद एक भजनों की स्वर लहरियों से समां इतना भक्तिमय हो गया कि लोगों को खुद की सुध ना रही और वे झूमने-गाने लगे। गिरधारीलाल गर्ग, रेणु बोर्दिया, केतन भट्ट सहित कई अनुयायियों ने भजन गाए।
पानी की बोतल, नाश्ता साथ लाए
इस आयोजन में बड़ी संख्या में बच्चे भी मौजूद थे जो अपने साथ पानी की बोतलें-चिप्स व बिस्किट आदि लाए। बच्चों द्वारा डिस्टर्ब नहीं करने के लिए अभिभावकों ने उन्हें खाने पीने की चीजों में रमा दिया व खुद भजन संध्या का आनंद लेते रहे। लोककला मंडल के बाहर सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी लाइन लगी हुई थी। कला मंडल से आरएसएमएम आफिस के बाहर तक चार व दुपहिया वाहन खड़े थे। इसी तरह अंदर मधुबन की गलियों में भी वाहन खड़े किए गए थे।
सुदर्शन क्रिया व गुरुवंदन
इससे पूर्व सुबह साढ़े पांच बजे संस्थान से जुड़े सदस्यों ने शक्तिनगर स्थित कम्युनिटी हॉल में सामूहिक सुदर्शन क्रिया में हिस्सा लिया। तड़के करीब एक हजार लोगों ने विशिष्ट साधना के साथ पूरे विश्व के आनंद व कल्याण की भावना से ओतप्रोत होकर सुदर्शन क्रिया पूरी किया। सुखाड़िया सर्कल स्थित केन्द्र पर गुरु पूजन हुआ। बाद में सदस्य विभिन्न समूहों में बंटकर सेवा कार्यों में लगे। इस क्रम में नीमच माता कच्ची बस्ती के बच्चों के लिए सांयकालीन शिक्षण कार्यक्रम शुरु हुआ।