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पानी के लिए 42 करोड़ पानी में

शिवपुरी. g जिले में जल स्तर बढ़ाने और जल संरक्षण से जुड़े कार्यो पर 42 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च कर दी गई। इसके बावजूद न जल स्तर बढ़ा और न ही पानी को रोका जा सका। हालात यह हैं कि जिले में तीन दिन से सात दिन में लोगों को एक बार पानी नसीब हो पा रहा है।

जिले में जल संरक्षण के लिए छह हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए और इन पर 42 करोड़ 55 लाख से अधिक राशि खर्च की गई, पर किसी भी विकासखंड में भूमिगत जलस्तर एक इंच भी नहीं बढ़ सका। बल्कि पिछले साल की तुलना में भूमिगत जल स्तर पांच से सात मीटर तक नीचे चला गया है।

जिला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की फरवरी माह की रिपोर्ट बताती है कि पांच साल पूर्व वर्ष 2003 में जिले के ग्रामीण क्षेत्र में महज 15.85 मीटर पर भूमिगत जल उपलब्ध था, पर वर्ष 2004 में यह 16.70 मीटर के स्तर तक नीचे चला गया। फिर वर्ष 2005 में 21.28, वर्ष 2006 में 22.21 और वर्ष 2007 में 25.70 मीटर तक भूमिगत जल नीचे चला गया। इस साल इसकी गिरावट छह मीटर तक दर्ज की गई है। इस लिहाज से देखें तो जलाभिषेक अभियान पर खर्च की गई राशि से एक इंच भी भूमिगत जल स्तर नहीं बढ़ा। अब इस पैसे का किस तरह से उपयोग किया गया.? यह शोध का विषय है। विशेषज्ञों की मानें तो जिले में भूजल स्तर में गिरावट लगातार हो रही है।

सरकारी अफसर इस गिरावट की वजह कम वर्षा को बता रहे हैं, पर हकीकत यह है कि बरसात उतनी कम भी नहीं हुई है, जितनी बताई जा रही है। पानी की इस त्रासदी की सबसे अहम वजह है-भूजल का अत्यधिक दोहन और इसके लिए हर ब्लाक में पिछले तीन साल में हजारों की संख्या में खोदे गए ट्यूबवेल। जिले में शासकीय और निजी तौर पर भूमि में हर साल सैकड़ों ट्यूबवेल खनन कर पानी का दोहन किया जा रहा है।

एक अनुमान के मुताबिक, जिले में पिछले पांच साल में पानी की खपत दस गुना तक बढ़ गई है। इसका असर भूजल के भंडारण पर पड़ रहा है। लेकिन सबसे अहम मुद्दा यह है कि इस कमी की भरपाई के लिए जलाभिषेक जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं और इनके कार्यो पर 42 करोड़ से अधिक खर्च किए गए हैं। इसमें न केवल चार सैकड़ा से अधिक तालाब बनाए गए हैं, बल्कि वाटर रीचार्जिग के स्ट्रक्चर पर भी बड़ी राशि में धन खर्च किया गया है फिर भी ग्राउण्ड वाटर लेवल का न बढ़ना चिंतनीय है।

करैरा में 19 मीटर गिरा जल स्तर

भूमिगत जलस्तर में गिरावट सबसे अधिक करैरा ब्लाक में दर्ज की गई है। पीएचई विभाग की रिपोर्ट कहती है कि करैरा ब्लाक में जनवरी 2007 तक औसतन 13.61 मीटर पर भूमिगत जल उपलब्ध था, पर इस साल जनवरी 08 में जब सर्वे किया गया तो यह जल स्तर 19 मीटर और नीचे उतर गया। यह स्थिति तो जनवरी तक की है, जबकि फरवरी-मार्च और अप्रैल माह में भूमिगत जल स्तर में और गिरावट आई है और यह गिरावट चार से पांच मीटर बताई गई है।





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