बीकानेर. पानी और बिजली की कमी ने गर्मी के असर को दुगुना कर दिया है। चालीस पार पहुंच रहे शहर के तापमान में जहां पानी और हवा की जरूरत बढ़ रही है वहीं पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है और बिजली गुल ही मिल रही है।
शहर में आज भी अस्सी फीसदी आबादी पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। ऐसी स्थिति में लोगों का गर्मी में जीना मुहाल हो चुका है। जिन घरों में इनवर्टर लगे हैं वहां भी बढ़ता लोड असहनीय हो रहा है। बिजली विभाग का कहना है कि उनके पास पूरी बिजली है लेकिन आमआदमी बिजली की कटौतियों से पूरी तरह से परेशान हो चुका है।
पानी की स्थिति भी लगातार बिगड़ती जा रही है। शोभासर जलाशय में पानी खत्म होने के कगार पर है और बीछवाल जलाशय का पानी भी ज्यादा नहीं है। अगर जल्दी ही पानी नहीं मिला तो शहर में कटौती की अवधि और बढ़ जाएगी। जिन घरों में स्टोरेज-टैंक है वहां तीन-चार दिन के पानी का स्टॉक है लेकिन शहर की कच्ची बस्तियों में पानी के स्टोरेज के लिए प्रबंध नहीं है।
लोग मटकियों, माटों और बाल्टियों में पानी रखते हैं। इन क्षेत्रों में अगर दूसरे दिन पानी नहीं मिले तो हाहाकार मच सकता है लेकिन इन स्थितियों से बेखबर जलदाय विभाग का कहना है कि पानी की कमी नहीं आने दी जाएगी।
जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता विनय माथुर का कहना है कि जल्दी ही हमें पानी मिल जाएगा। दोनों जलाशयों में पानी कम है लेकिन स्थितियां हमारे नियंत्रण में है। विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता हवासिंह का कहना है कि शहर में विद्युत खपत लगभग 20 फीसदी बढ़ गई है लेकिन बिजली की उपलब्धता में कोई कमी नहीं आई है। बिजली गुल होने की वजह आंधी या पतंगबाजी की वजह से आने वाले फाल्ट हो सकते हैं जिन्हें शिकायत मिलने के साथ ही दुरुस्त करवाया जा रहा है।
कुंडी क्यों नहीं बनाते
कच्ची बस्तियां और ऐसे इलाके जहां पानी की किल्लत रहती है, वहां जलदाय विभाग के अधिकारी बार-बार जाकर पानी के स्टोरेज के लिए वाटर-टैंक बनवाने की बात कहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि पानी का टैंक अगर बनवा लिए जाए तो दो दिन पानी नहीं आए फिर भी किल्लत नहीं होगी लेकिन इन क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पानी का टैंक (कुंडी) बनवाने में एक कमरा बनाने जितना खर्च आता है। हमारे पास जब रहने के लिए घर ही कच्च-पक्का है तो कुंडी कहां से बनवाए। इस सवाल का जवाब अधिकारियों के पास नहीं है।