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35 हजार छात्र, 80 कोर्स : शिक्षक 15

कोटा. वर्धमान खुला विश्वविद्यालय के स्थापित होने के बाद वर्ष 1987 में विवि में 9 कोर्सेज में चार हजार छात्र और 40 शिक्षक थे। इन 20 वर्र्षो के बाद विवि में 18 शिक्षकों के सहारे 80 कोर्सेज चलाए जा रहे हैं। इन कोर्सेज में 35 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।

विवि में कई शिक्षक व कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए। खाली हुए पदों को नहीं भरा गया। नए कोर्सेज शुरू करने पर राज्य सरकार से पद स्वीकृत करने के प्रस्ताव भेजे गए लेकिन, मंजूरी नहीं मिल सकी। शिक्षकों की कमी से पिछले 19 साल से कोर्सेज में बदलाव नहीं किया जा सका। इस बार विवि प्रशासन ने जैसे- तैसे पाठ्यक्रमों में बदलाव किया है।

शिक्षकों की कमी के चलते कई पाठ्यक्रम में समय पर तैयार नहीं हो पाए। इस कारण बीजेएमसी, लोकप्रशासन, राजनीतिविज्ञान व कई छह माह पाठ्यक्रमों की किताबें समय पर नहीं छप पाई। इस कारण छात्रों को अब किताबें भेजीे जा रही है।

विवि में बीजेएमसी का कोई शिक्षक नहीं है। बीएससी शुरू कर दी, लेकिन शिक्षक एक भी नहीं है। बीएड व एमए इन एजुकेशन पाठ्यक्रम, हिंदी व अंग्रेजी में एक-एक शिक्षक है। शिक्षकों की कमी की वजह से छात्र पाठ्यक्रम संबंधी समस्याओं का निदान नहीं हो पाता है। एसाइनमेंट तैयार करने में छात्रों को कई परेशानियां हो रही हैं।

राज्य सरकार को शिक्षकों के पदों के प्रस्ताव भेजे जाते हैं। कार्यरत शिक्षकों के सहयोग से ही काम चलाया जा रहा है।
—प्रो. नरेश दाधीच, कुलपति





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