झुम्पा लाहिड़ी की नई किताब द अन अकस्टम्ड अर्थ, बाजार में आते ही हाथों-हाथों बिक गई। 34 साल की इस युवा लेखिका ने साबित किया है कि लेखन के लिए उम्र नहीं प्रतिभा और विषयों की जरूरत होती है। भारत के युवा लेखक इनसे प्रेरणा ले सकते हैं..
प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार विजेता झुम्पा लाहिड़ी भारतीय मूल की प्रथम महिला हैं। हालांकि पुरस्कार की दौड़ उनके लिए आसान नहीं थी। सचमुच कितना दिलचस्प और खूबसूरत लगता है कि किसी लेखक की पहली किताब छपकर आए और वह लोगों के दिलों-दिमाग पर छा जाए। झुम्पा के साथ ऐसा ही हुआ।
उसके पिता लाइब्रेरियन हैं और मां शिक्षक। लिहाजा पुस्तकों से प्रेम उसे विरासत में मिला। अचरज नहीं पर नन्हीं झुम्पा ने बचपन में किताबें पढ़ते हुए किताब लिखने का सपना देखा हो। बहरहाल, जब वह स्कूली छात्रा थी, लिखने का सिलसिला शुरू हो गया। शनै:- शनै: उसका रुझान गल्प लेखन की ओर विकसित हुआ। अंग्रेजी साहित्य में एमए करने तक उसका यह शौक परवान चढ़ चुका था। न्यूयार्कर पत्रिका में छपी कहानियों ने उन्हें शोहरत दी और सुर्खियां भी। प्रेम संबंध पर आधारित सशक्त कहानी ‘सैक्सी’ के ‘न्यूर्याकर’ में छपने की देर थी कि वे सुर्खियों में आ गईं।
सुश्री लाहिड़ी चौंतीस वर्ष की हैं और ‘इंटरप्रीटर ऑफ मेलोडीज’ उनकी पहली प्रकाशित कृति है। यह उम्र साहित्य के क्षेत्र में पेंग भरने की तो होती है, लेकिन अक्सर पेंग इतनी ऊंची नहीं होती कि कोई झूले से उछलकर उड़नखटोले में पहुंच जाए और आसमान को छू ले। इस लिहाज से झुम्पा सौभाग्यशाली हैं। झुम्पा जन्म से भारतीय नहीं हैं। उसका जन्म सन् 1967 में लंदन में हुआ।
बोस्टन विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य-रचनात्मक लेखन, तुलनात्मक अध्ययन और कला में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। सुश्री लाहिड़ी उन लेखकों में एक हैं, जिनकी ख्याति कहानी-दर-कहानी आगे बढ़ती है। उनके व्यक्तित्व के साथ पुरस्कारों की लड़ी गुंथी हुई है। सुश्री लाहिड़ी प्रोविंसटाउन में फाइन आर्ट्स वर्कसेंटर की फेलो भी हैं।’ उनके पुरस्कृत कथा संकलन का प्रकाशन हाउटन मिकलिन कंपनी ने किया है। संकलन की कहानियां भारतीय उत्प्रवासियों के जीवन के अनुभवों पर आधारित हैं। पुलित्जर पुरस्कार की जूरी की सदस्या सुश्री वेंडी लेसर का कहना है कि वे कहानी संग्रह को लेकर रोमांचित हैं।
सरहदों से बिछड़ने का गम झुम्पा लाहिड़ी की नई किताब अन अकस्टम्ड अर्थ छोटी और क्लासिक कहानियों का संग्रह है। कहानियां सरहदों से परे जाकर रिश्तों के बारे में गहराई से बताती हैं। पहली कहानी एक पिता के अपनी बेटी और उसके बेटे के साथ के रिश्तों की कहानी कहती है। जिंदगी में बनने वाले हर रिश्ते के बारे में लाहिड़ी ने इस किताब में बात की है। ओनली गुडनेस एक बहन के पछतावे की कहानी कहती है जब उसका भाई शराब के कारण परिवार को धमकाने लगता है। ए चाइस आफ एकोमोडेशन में एक रात की कहानी है जब एक पति अपनी पत्नी से अपने बीते वक्त की बात करता है।