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गोअस्थि कलश यात्रा शुरू

सादुलपुर. संपूर्ण गोमाता रक्षा अभियान भारत के तत्वावधान में मंगलवार सुबह गोहत्या स्थल कांधराण की रोही से नौ गायों की अस्थि कलश यात्रा शुरू हुई। अस्थि कलश यात्रा को संपूर्ण गोमाता रक्षा अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी रामभक्त ने भगवा झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर संघर्ष समिति के प्रधान माईराम पूनिया, सुल्तानसिंह निम्मड़, डा. कमल बेदी, रामावतार बैरासरिया, पारीक युवा महासभा के जिलाध्यक्ष राहुल पारीक सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे।

स्वामी रामभगत ने कहा कि जब तक संपूर्ण गोमाता की रक्षा के उपाय नहीं किए जाएंगे तब तक गोरक्षा का अभियान जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि यह अस्थि कलश यात्रा विश्वभारती गोवंश विकास संस्था तथा विश्व गो अखंड ज्योत संदेश यात्रा के संचालक महेंद्रसिंह गोदारा के नेतृत्व में तहसील के सभी गांवों में पहुंचेगी। यात्रा का उद्देश्य गोमाता के रक्षा के प्रति जनता में जागृति पैदा करना है। यात्रा 18 मई को राजगढ़ से हरिद्वार के लिए प्रस्थान करेगी। हरिद्वार में अस्थियां विसर्जित की जाएगी। यात्रा के कांधराण व रड़वा गांव पहुंचने पर गोभक्तों ने अस्थि कलशों पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। राजगढ़ में यात्रा को नगर के प्रमुख मार्गो से निकाला गया।

धरना जारी : गोहत्या के विरोध में शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को भी जारी रहा। संघर्ष समिति के प्रधान माईराम पूनिया के अनुसार धरने पर स्वामी रामभगत के नेतृत्व में बाबा रामदास खुडाणी, दीपाराम पूनिया, सुल्तान निम्मड़, राजेंद्र स्वामी, रामस्वरूप बिजारणिया, श्रीचंद कालरी, अंतरसिंह, महेंद्रसिंह, इंद्रसिंह, राजेंद्रसिंह, ओमप्रकाश, राजवीर, रामसिंह भगत, चांदूसिंह जाटूवास, मोहनदास, निहालाराम सांगवान, ओमप्रकाश प्रजापत, अमरसिंह पूनिया, भरताराम पूनिया, चेतराम फोगाट, महेंद्रसिंह बिरमी, मानसिंहराव, ताराचंद, ओमप्रकाश, बलवीर, रामानंद, रणवीरराव, दलवीर पूनिया, सुरेश, मूलाराम रेपसवाल, राजपाल सेपट, रामकुमार सेपट व नानूराम बराड़ सहित अन्य लोग बैठे। विश्व गो अखंड ज्योत संदेश यात्रा के संचालक महेंद्रसिंह गोदारा ने गोहत्या कांड की जांच सीबीआई से करवाने की मांग करते हुए कहा कि 18 मई को होने वाले गोरक्षा सम्मेलन से पूर्व सरकार व प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करे।

एक और संत ने अन्न त्यागा
सादुलपुर. गोहत्या स्थल कांधराण की रोही में मंगलवार को एक और संत ने अन्न त्यागने का निर्णय लिया है। इससे पूर्व पहाड़ी के संत जोहड़ नाथ गत 26 अप्रैल से अन्न का त्याग किए हुए हैं। मंगलवार को सीतामाई मठ करनाल के संत जीवनदास ने अन्न त्याग करने की घोषणा की। गौरतलब है कि दोनों ही संतों ने मुख्य रूप से दोषी गोहत्यारों को अब तक पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किए जाने पर अन्न का त्याग किया है। इधर अन्न का त्याग करने वाले साधु संतों की सुध लेने के लिए तहसील प्रशासन के किसी अधिकारी के नहीं पहुंचने से लोगों में रोष व्याप्त है।





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