माणकचौक व त्रिपोलिया से
चहल-पहल भरे बाजार माणक चौक खंदा और त्रिपोलिया बाजार में लोग सामान खरीद कर घर लौट रहे थे कि धमाकों ने सबकुछ दहला दिया। तेज रोशनी से लोगों की आंखें चुंधिया र्गई। जिसे जिधर राह नजर आई, उधर ही दौड़ पड़ा। पिंकसिटी का ‘दिल’ कराह उठा। सैलानियों से सदैव आबाद रहने वाले हवामहल व चौपड़ चंद लम्हों में वीरान हो गए।
बड़ी चौपड़ पर पांच मीटर के दायरे में हुए दो बम विस्फोटों के बाद सड़क पर खून बिखरा हुआ था। लोग डर कर इधर-उधर भाग रहे थे। सभी लोगों को डर था कि अगर इसी दौरान तीसरा विस्फोट हुआ तो उनकी जान चली जाएगी। बड़ी चौपड़ से दूर जाने के लिए कुछ लोग तो अपने वाहन सड़क पर ही छोड़कर रामगंज और त्रिपोलिया बाजार की ओर भागने लगे। त्रिपोलिया की ओर भाग रहे लोगों को जब विस्फोट की आवाज सुनाई दी तो भीड़ ने अपना रुख सांगानेरी गेट की ओर किया, लेकिन जाम होने के कारण लोग आगे नहीं बढ़ सके। इस दौरान लोगों के चेहरों पर मौत का खौफ छाया हुआ था।
थम गया बाजार
शहर सामान्य चल रहा है। बाजार में खरीदारी की चहल-पहल है। शाम 7.35 बजे का समय है। त्रिपोलिया बाजार के मनिहारों के रास्ते में अचानक सिलेंडर फटने की आवाज जैसा धमाका हुआ। एकबारगी किसी को कुछ समझ नहीं आया। भरे बाजार में हुए अचानक इस धमाके ने दहशत फैला दी। बाजार थम गया, अफरा-तफरी मच गई।
मनिहारों के रास्ते के बाहर त्रिपोलिया बाजार के इस हिस्से में धमाके के बाद अंगारे निकले और पूरा क्षेत्र धुएं से भर गया। धमाके के साथ ही दुकानों तथा घरों से निकलकर लोग सड़क पर आ गए। पहले तो कुछ समझ नहीं आया, फिर अचानक चीख-पुकार सुनकर कुछ लोग हिम्मत कर पतासे वालों की दुकान के पास हुए विस्फोट के पास गए। वहां देखा कि कई लोग खून में लथपथ पड़े हैं। इनमें से दो-तीन दुकानदारों ने उन्हें उठाया और एक गाड़ी में डालकर अस्पताल के लिए रवाना किया।
यहां लोग यह नहीं समझ नहीं पा रहे थे कि वे जाएं तो जाएं कहां, क्योंकि छोटी चौपड़ की ओर भागे तो पता चला वहां भी विस्फोट हुआ है। बड़ी चौपड़ की ओर दौड़े तो वहां भी। असमंजस की स्थिति में लोग गलियों के रास्ते घरों की ओर दौड़े। जिनके घर शहर के बाहरी इलाकों में थे, वे किसी न किसी के साथ हो लिए। किसी को सुध नहीं थी कि वे अपना वाहन उठाएं या कहां जाएं।
हड़बड़ाहट में दुकानदारों ने आव देखा न ताव, फटाफट दुकानें बंद कर दीं और सड़कों पर आ गए। इनमें से कई दुकानदार लोगों को शांत रहने और तसल्ली रखने को कहने लगे। वे लोगों को समझाते रहे कि धैर्य न छोड़ें, सड़क के बीच में रहें। भागें-दौड़ें नहीं।
आंखें चुंधियरई : हालांकि पुलिस की बाड़ेबंदी कर दी गई थी। लोग समूह बनाकर विस्फोट की चर्चा करते रहे। त्रिपोलिया गेट पर खड़े सिकंदर, सुरेंद्र और राजेश्वर राय ने बताया कि वे मौके के पास से गुजर रहे थे कि घटना से वे चौंक गए। अचानक तेज रोशनी से उनकी आंखें चुंधिया र्गई। वे दूर खड़े होकर देखते रहे। लोगों की चीख से उनकी भी आंखों में आंसू आ गए।
वाहन उठाए और दौड़ पड़े : त्रिपोलिया बाजार में जब यह संवाददाता गया तो वहां अफरा-तफरी के माहौल के बीच लोग अपने वाहन उठाकर यहां-वहां जाते नजर आए। हड़बड़ाहट में जिसे जो रास्ता सूझा, वहीं निकल पड़ा।
सूने हुए बाजार : साढ़े सात बजे से रात आठ बजे तक खचाखच भरा रहने वाला त्रिपोलिया बाजार व चौड़ा रास्ता मंगलवार को इसी वक्त पूरी तरह बंद हो चुका था। लोग सड़कों पर समूह बनाकर खड़े थे। कोई फोन मिलाकर अपनों से बात करने का प्रयास कर रहा था तो कोई क्या हुआ, कैसे हुआ जैसे सवालों में उलझा हुआ था।
फिर भी खुले रहे पेट्रोलपंप : परकोटे में कई जगह विस्फोट से रोक दिए गए यातायात के बावजूद पेट्रोल पंप खुले रहे। अजमेरी गेट पर ये तीन पेट्रोल पंप विस्फोट वाली घटनाओं से कुछ ही दूरी पर हैं। इनके खुले रहने से किसी भी प्रकार की बड़ी दुर्घटना का अंदेशा रहा।
घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत : विस्फोट के बाद मोबाइल व टेलीफोनों पर पारिवारिक लोग एक-दूसरे को घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायतें भी देते रहे। हालांकि नेटवर्क जाम होने से मोबाइल व टेलीफोन नहीं मिल रहे थे।
इंतजार में खड़े रहे लोग : विस्फोट के बाद कई जगह से रास्ते रोकने के बाद बसों का संचालन प्रभावित रहा। परकोटे से बाहर निकले लोग बसों के इंतजार में अजमेरी गेट यादगार के सामने, एसएमएस अस्पताल, एमआई रोड आदि स्थानों पर देर रात तक बसों के इंतजार में खड़े रहे। अधिकतर तो जो भी बसें र्आई, उनमें ही सवार हो गए। उनका कहना था कि परकोटे से तो दूर जाएं, वहां जाकर देखा जाएगा।
हालचाल पूछते रहे : जयपुर के बाहर से परिवार और जान-पहचान वालों के फोन आते रहे कि वे सुरक्षित तो हैं न। जयपुर में क्या हुआ, कितने मरे, कितने घायल हुए, इतने विस्फोट क्यों हो गए, ऐसे फोन जयपुरवासियों के पास आते रहे।
यातायात पुलिस के सिपाही लेते रहे तलाशी: विस्फोट के बाद बाजार में खड़े कुछ स्कूटरों और मोटरसाइकिलों के बैगों में यातायात पुलिस के सिपाही तलाशी लेने में जुट गए। वे देख रहे थे कि किसी वाहन में तो कुछ संदिग्ध चीज तो नहीं है।
व्यवस्थाओं में जुटे थे लोग : त्रिपोलिया बाजार, त्रिपोलिया गेट, अजमेरी गेट, न्यू गेट और चौड़ा रास्ता में कुछ लोग सिपाहियों के साथ व्यवस्थाओं में जुटे थे। वे हाथों में लाठियां लेकर लोगों को पार्किग एरिया से दूर करने के प्रयास कर रहे थे। वे लोगों को समझा रहे थे कि बिना भगदड़ के धैर्यपूर्वक घरों को लौट जाएं। वे सड़क के बीच ही रहने की सलाह भी दे रहे थे।
अस्पताल वालों को कोसा : एसएमएस अस्पताल में चिकित्सकों व र्न्िसग स्टाफ की कमी के कारण घायलों का समय पर इलाज नहीं हुआ, तो उनके रिश्तेदार अस्पताल प्रशासन पर बरस पड़े।
भीड़ ही भीड़ : अस्पताल परिसर व बाहर लोगों की जबर्दस्त भीड़ थी। उनको रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस भी तैनात थी। इमरजेंसी के बाहर अपनेपरिजनों का हाल जानने के लिए परेशान लोग बार-बार अंदर आने की कोशिश कर रहे थे। मुर्दाघर के बाहर भी कई लोग रोत-चिल्लाते दिखे। कई को तो मालूम नहीं चल पाया कि उनके परिजनों का क्या हुआ।
मंत्रियों का दौरा : गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, सार्वजनिक निर्माण मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने घायलों का हालचाल जानने के लिए अस्पताल का दौरा किया।