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‘माधुरी’ का मतलब ‘मां अधूरी’

जयपुर. मकबूल फिदा हुसैन विवादों से घिरे रहने वाले मशहूर चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन का दावा है कि वे माधुरी दीक्षित के दीवाने नहीं हैं और न ही उन्होंने माधुरी के कृतित्व और व्यक्तित्व को ध्यान में रखकर कभी कोई रचना गढ़ी है। उनके लिए तो माधुरी का अर्थ ‘मां-अधूरी’ है।

हाल ही में दुबई में हुई एक संगोष्ठि में भाग लेकर लौटे जयपुर के सीनियर आर्टिस्ट सुरेंद्र पाल जोशी ने बताया कि दुबई में पत्रकारों से बातचीत में माधुरी के व्यक्तित्व को अपने रंगों में समेटने के सवाल पर हुसैन ने कहा, ‘लोगों ने मुझे बेवजह माधुरी का दीवाना बना दिया है जबकि ऐसा नहीं है।’

मां जैसी माधुरी

मकबूल फिदा हुसैन ने कहा, ‘मैं बमुश्किल 1-2 साल का था जब मेरी मां का देहांत हो गया था। उस समय मां की उम्र 25 वर्ष रही होगी। मैं आज भी जब अपने इंदौर स्थित घर पर जाता हूं तो मुझे ऐसा महसूस होता है कि मेरी मां मुझे घर की दीवारों और गलियारों से निहार रही है।

मां की कद-काठी माधुरी जैसी होने की वजह से मैं उनमें अपनी मां को देखता हूं और यही वजह है कि मैं माधुरी दीक्षित पर फिल्म और पेंटिंग बनाकर अपनी मां की इसी अधूरी याददाश्त को पूरा करने की कोशिश करता हूं।’





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