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Chandigarh Chandigarh खरड़अगस्त 2007 में खुद को मृत घोषित कर अंडरग्राउंड हुए पीओ बिक्रम सिंह को पुलिस ने जीवित पकड़ लिया है। बिक्रम मोहाली और चंडीगढ़ पुलिस को कई बार धोखा दे चुका है। मोहाली पुलिस द्वारा दर्ज तीन और चंडीगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज एक मामले में से किसी भी मामले में बिक्रम गिरफ्तार नहीं हो पाया था।
अगस्त 2007 में बिक्रम के पिता जंग सिंह ने अखबार में लावारिस लाश की खबर पढ़कर चंडीगढ़, सेक्टर-17 की पुलिस से संपर्क कर कहा कि उक्त लाश उसके बेटे बिक्रम की है। पुलिस ने लाश जंग सिंह को दे दी और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। कुछ दिन बाद चंडीगढ़ पुलिस को असली मृतक के घरवालों ने संपर्क किया। तब पुलिस को पता चला कि जंग ने उनके साथ धोखा किया है। पुलिस ने लुधियाना जिले के माछीवाड़ा निवासी जंग सिंह और उसके पुत्र बिक्रम के खिलाफ मामला दर्ज किया, पर बिक्रम फिर भी गिरफ्तार नहीं हो सका।
माछीवाड़ा के रहने वाले बिक्रम सिंह की शादी खरड़ की मंजीत कौर से हुई थी। पेशे से प्रोफेसर बिक्रम सिंह पर शादी के कुछ समय बाद ही मंजीत ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाया था। इसके बाद बिक्रम ने खरड़ में मंजीत के घर जाकर उसके घरवालों को पीटा। तब खरड़ पुलिस ने फिर बिक्रम पर जानलेवा हमले के आरोपों के तहत आईपीसी की धारा 307 का मामला दर्ज किया। चंडीगढ़ पुलिस के साथ धोखाधड़ी करने पर भी बिक्रम और उसके पिता जंग सिंह पर 419 व 420 का मामला दर्ज हुआ।
बिक्रम को पीओ घोषित किया हुआ था, जिसके चलते पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए ट्रैप लगाए हुए थे। बिक्रम से पूछताछ की जा रही है। प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि वह दिल्ली सहित कई शहरों में भेष बदलकर रहता रहा, आगे की पूछताछ जारी है।
-मंजीत सिंह, इंचार्ज, सिटी पुलिस स्टेशन खरड़