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अब आयुर्वेद-ज्योतिष से करें बीमारियों का उपचार

अहमदाबाद. परिवर्तन प्रकृति का नियम है और इसका प्रमाण अब आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी देखने को मिल रहा है। आयुर्वेद व ज्योतिष शास्त्र की मदद से इलाज करने का एक नया तरीका अहमदाबाद में पिछले तीन सालों के दौरान तेजी से लोकप्रिय हुआ है। कलर थैरेपी, हवन थैरेपी एवं प्राणिक हीलिंग जैसी नई चिकित्सा पद्धतियों के बीच लोग इसे काफी पसंद कर रहे हैं।

ज्योतिष शास्त्र की मदद से उपचार करने वाले आयुर्वेदाचार्यो के अनुसार, इस पद्धति से रोगों के उपचार में 80 प्रतिशत से अधिक फायदा होता है। आयुर्वेद के जानकार और आयुर्वेद में अध्ययनरत युवा भी इस नए चलन को अपना रहे हैं।

क्या है आयुर्वेद-ज्योतिष : आयुर्वेद-ज्योतिष चिकित्सा पद्धति से इलाज करने वाला आयुर्वेदाचार्य ज्योतिष का भी जानकार होता है। इस पद्धति में रोगी का इलाज उसके जन्म स्थल, जन्म समय, ग्रहों की चाल व जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार किया जाता है। विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि यह पद्धति भावी रोगों से छुटकारा दिलाने में भी सक्षम है।

ग्रहों का खेल : अखंडानंद आयुर्वेदिक कॉलेज, अहमदाबाद के रिटायर्ड अध्यापक जनार्दन भाई दवे (67) कहते हैं कि कुंडली में अगर कोई ग्रह रोग का कारक बन जाए तो दूसरा ग्रह उससे बचाता है। उपचार के दौरान अन्य ग्रहों की स्थिति का भी ध्यान रखना पड़ता है।

न मानने वाले : दूसरी तरफ कुछ आयुर्वेदाचार्य ऐसे भी हैं, जो इस नई पद्धति को स्वीकार नहीं करते। डॉ. अनिश चंदाराणा के अनुसार, आयुर्वेद एक चिकित्सा विज्ञान है, इसलिए उपचार में ज्योतिष शास्त्र के दखल को बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस नई चिकित्सा पद्धति के प्रभाव पर भी शंका जताई है।

* 'आयुर्वेद व ज्योतिष शास्त्र एक-दूसरे के पूरक हैं। इन दोनों के समन्वय से रोग को दूर भगाने में शत-प्रतिशत सफलता मिलती है। इससे ज्योतिष व आयुर्वेद में रोगी की श्रद्धा भी बढ़ती है।'
- कंदर्प त्रिवेदी, ज्योतिषाचार्य

* 'इस पद्धति से इलाज करने पर मेरे पैरों की तकलीफ 60 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गई है।'
- मनीषभाई पटेल, मरीज





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