HomeNewsRajasthanJodhpur Jodhpur

जोधपुर के नाम गौरव पथ का खत

जोधपुर. pathमैं हूं गौरव पथ, मेरी परिकल्पना, सोच और निर्माण एक लंबी दास्तान है। चूंकि चौदह माह के इस सफर से आज मैं दुनिया के लिए ‘आÊाद’ हुआ हूं तो कुछ कहने लायक बना हूं। मैं पहले रेजिडेंसी रोड तथा मथुरादास माथुर रोड के नाम से जाना जाता था। आज से मैं बन गया हूं गौरव पथ..।

मेरा दर्द ना जाने कोय.
आज से ठीक चौदह माह पहले जब मेरा निर्माण शुरू किया गया तब से अब तक मेरे नाम के साथ कितने विवाद, कितने घोटाले व कितनी घटनाएं जुड़ती गईं। इसका मेरे पास कोई हिसाब नहीं है। हां, मूल रूप से मेरे लिए स्वीकृत हुआ 9.5 करोड़ का बजट मेरे निर्माण में देरी के साथ बढ़ता गया और मेरे पूर्ण होने तक 13 करोड़ को पार कर गया। यह तो हुई मेरे निर्माण पर हुए मूल खर्च की बात। यदि मेरे किनारों पर बनाए गए कॉर्नर पार्क, आइलैंड, ग्रीन पैच रोशनी, विद्युत केबलिंग आदि का हिसाब लगाया जाए तो मेरे खाते में 22 करोड़ से अधिक की राशि नामे लिख दी गई है।

कितनी पेशियां
जिस शहर के गौरव को बढ़ाने के लिए मेरा निर्माण किया गया उस शहर के बाशिंदों से मेरे कुछ सवाल हैं..उच्च तकनीकी व समयबद्ध कार्य के लिए पाबंद करने के आदेश के बावजूद मेरे पूर्ण होने के लिए कितनी पेशियां दी गईं। पहले 20 जुलाई 2007, फिर 15 अगस्त, बाद में 30 अक्टूबर फिर भी बात नहीं बनी तो 20 मार्च 2008 और 21 अप्रैल की तारीखें आई और चली गईं। यह तो भला हो मुख्यमंत्री का, जिसने गत माह मुझ से खिलावाड़ करने वालों को लताड़ लगाई तो पूरा प्रशासन दिन रात जुट गया मेरा निर्माण पूरा करने में। वरना शायद एक वर्ष और लग जाता मेरे आजाद होने में।

सब फिल्मी सेट की तरह
आप यकीन मानें मुझे एक ओर जहां आर्किटेक्ट व इंजीनियरों की सनक का बार-बार शिकार होना पड़ा, वहीं मेरे आस पास हरियाली और फुलवारी रातों रात पौधों व घास को रोप कर की गई। फिल्मी सेट की तरह जुटाया गया यह चमन कब तक आबाद रहेगा..।

रात भर कराहता रहा
मेरी आजादी से एक रात पहले ऑफिसर्स मैस के ठीक पास में जहां नया नया डामर किया गया था रात को एक ट्रक का पहिया मुझ में धंस गया व मैं रात भर कराहता रहा। मेरे सीने पर जहां तहां गड्ढों पर डामर लगा कर मेरे मखमली गौरव पर टाट के पैबंद लगा कर उद्घाटन से पहले ही बदसूरत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मेरे किनारे लगे घड़ाई वाले छीतर के कर्व स्टोन व जालियों से कुछ समय तक मेरी चमक भले ही नजर आए, मगर यदि नियमित सार संभाल नहीं हुई तो मेरा क्या हश्र होगा?





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: