लीडरशिप मंत्र. हम सभी ने जीवन के किसी न किसी मोड़ पर यह कहावत जरूर सुनी होगी, ‘प्रैक्टिस मेक्स मैन परफेक्ट।’ यहां मैं इस कहावत से जुड़ी एक घटना शेयर करना चाहूंगा, जिसमें परफेक्शन की खोज भी कभी-कभी आपको संकट में डाल सकती है। मेरे एक सहयोगी थे, बेहद तीक्ष्ण बुद्धि के। वे तब तक कोई काम शुरू नहीं करते थे, जब तक उसकी एक-एक बारीकी पर अच्छे से विचार न कर लें। नतीजतन उनके काम में दोष निकालना बहुत मुश्किल होता था।
बस, उनकी खामी यह थी कि वे काम को पूरा करने के लिए समय बहुत लेते थे। एक बार हमारे बॉस ने उन्हें एक प्रोजेक्ट दिया। उस पर बहुत तेजी से काम होना था, लेकिन अपनी आदत के अनुसार उन्होंने सबसे पहले उसके विभिन्न पहलुओं पर विचार करना शुरू किया। इस विचार प्रक्रिया में ही सप्ताह भर बीत गया और अगले दिन उन्हें वह प्रेजेंटेशन देना था और उनके पास कुल जमा 20 घंटे बचे थे। खास बात यह कि वे बॉस को समय पर काम पूरा करने का आश्वासन दे चुके थे, लेकिन यह नहीं बताया था कि उन्होंने अभी सिर्फ विचार-विमर्श ही पूरा किया है, काम नहीं शुरू किया है। हुआ वही जिसकी आशंका थी, समय पर प्रोजेक्ट पूरा न हो सका और बॉस को बेहद जरूरी मीटिंग रद्द करनी पड़ी।
अत: हमेशा याद रखें परफेक्शन अच्छा होता है, लेकिन तुरंत काम भी जरूरी होता है। उसके लिए समय बर्बाद न करें। जब समय कम हो, तो सबसे पहले प्राथमिकताएं तय कर लें कि पहले करना क्या है। बेसिक पर पूरा ध्यान दें। उसे पहले निपटा लें और अगर फिर भी समय शेष है तो बारीकियों पर ध्यान देना शुरू करें।
अगर आप कहते हैं कि किसी काम को तब ही शुरू करेंगे, जब उसके बारे में सौ फीसदी जानते होंगे, तो इसे नासमझी ही कहा जाएगा।
-लेखक नेतृत्व प्रशिक्षण संस्था लीडकैप के संस्थापक हैं।