जयपुर.
जयपुर शहर में सीरियल बम ब्लास्ट के बाद बुधवार सुबह एसएमएस अस्पताल में घायल मरीजों और परिजनों के लिए उम्मीदों की रोशनी लेकर आई। सारा शहर मानो सब भूल पीड़ितों की मदद के लिए अस्पताल में इकट्ठा हो गया और फिर जिससे जो बन पाया उसके लिए पूरी शिद्दत से जुट गया।
अक्सर ब्लड की कमी से जूझते अस्पताल में बुधवार को दिनभर ब्लड दान करने वालों का हुजूम लगा रहा, तो मुर्दाघर जहां आम दिनों में ही लोग जाने से कतराते हैं वहां अनजान, अपरिचित लोगों के प्रति उमड़े मानवीयता के रिश्ते से मुर्दाघर की जटिलताओं को सुलझाने में जद्दोजहद करते रहे।
राज्य सरकार की ओर से भले ही संवेदनशील इलाकों में कफ्यरू लगाया गया, लेकिन पीड़ितों के प्रति भावनाएं प्रकट करने और मरीजों के सेवाभाव के लिए शहरवासियों ने व्यवसाय-प्रतिष्ठान छोड़ एसएमएस अस्पताल की ओर दौड़ लगा दी। एक-एक घायल की सेवा में दस-दस लोग लगे हुए थे। जयपुर के साथ आसपास ही नहीं दूरदराज के शहरों से भी लोग केवल घायलों की मदद के लिए अस्पतालों में कतारें लगाए हुए थे।
घटना के बाद बुधवार सुबह अपनों की फिक्र में दूर-दराज से परिजन बिलखते आए, लेकिन उनकी अपूरणीय क्षति के बावजूद किसी अनजान हाथों से उनकी मदद में तत्परता को देख उनका आधा दर्द जैसे कम हो गया।
छोटी काशी में नहीं थमा भक्तों का कारवां
छोटी काशी कही जाने वाले जयपुर में मंगलवार को मंदिरों को निशाना बनाकर हुई आतंकी घटना के बाद भी आस्था का सैलाब नहीं थमा। बुधवार को ही मोतीडूंगरी मंदिर की तरफ जाने वाले भक्तों का कारवां हो या फिर नियमित गोविन्द देवजी के दर्शनार्थी। सभी अपने नियत समय पर अपने आराध्य के दर को धोकते दिखे।
नियमित गोविन्द देवजी मंदिर जाने वाले ब्रम्हापुरी निवासी सेवानिवृत अध्यापक गोविन्द शर्मा और व्यावसायी अखिलेश गुप्ता का कहना था, ‘वो दुस्साहसी तो यही चाहते हैं कि हम घबरा जाएं और थम जाएं, लेकिन हम भी उन्हें दिखा देंगे कि हम डिगने वाले नहीं। इस शहर की महान परम्पराएं और अमन, शांति यूं ही चिरस्थायी बनी रहेगी।’
आज कत्तव्र्य की बात करें
एसएमएस अस्पताल में मरीजों की सेवा के लिए वो हाथ भी आगे आए, जो अपने आप में मिसाल बन गए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जयपुर ब्रांच के उपाध्यक्ष डॉ. ईश मुंजाल सहित डॉ. प्रवीण मंगलूनिया ने बताया कि घटना की रात 2 बजे जब वो मरीजों के लिए पानी का काटरून लेने एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे। जैसे ही उन्होंने पैसे आगे किए तो उसने, ‘साहब जब आप लोग सहित पूरा शहर मदद के लिए आगे आया है तो हमें भी सहयोग का मौका दें। वैसे भी इन्हीं की बदौलत ये शानो-शौकत है। आज ऊपर वाले ने मौका दिया है जब सारे मेडिकल स्टोर बंद हैं तो हम अपना फर्ज अदा करें।’ और पैसे लेने से साफ इंकार कर दिया।
आज नाम ना पूछें बस काम करने दें
मरीजों के लिए सेवाभाव इतना था कि डॉक्टर, रेजिडेंट बिना प्रचार की भूख के तन, मन से जुटे रहे। जब हर कोई आतंकी घटना के मृतक, घायलों की देखरेख में लगा था तो अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों ने भी धैर्य बनाए रखा। घाटगेट निवासी बुजुर्ग गोरा देवी (80) जो कि कुछ समय से अकेली अस्पताल में इलाज ले रही थीं, उसकी तबियत बिगड़ी और आवाज तक मुंह से नहीं निकली। उसकी यह हालत देख एक महिला रेजीडेंट दौड़ पड़ी और बुजुर्ग मरीज की सहायता के लिए कंधों का आसरा देकर बाथरूम से उसके बैड तक पहुंचाया, बल्कि उसके व्यस्त डॉक्टरों से इलाज की व्यवस्था की। भास्कर संवाददाता ने परिचय देते हुए जैसे ही रेजीडेंट से जानकारी चाही तो उन्होंने तपाक से, ‘सर, प्लीज आज नाम नहीं, केवल काम।’ कहकर दूसरे मरीजों की ओर रुख कर गईं।
यूं नजर आई इंसानियत
इंग्लैण्ड निवासी एस्टा नामक विदेशी महिला ने अस्पताल के पोलीट्रोमा वार्ड में घंटों मरीजों की देखरेख में जुटी रहीं। इसे नजारे ने उन कार्यकर्ताओं में भी जान फूंक दी जो रातभर की अथक मेहनत से पसीज आए थे। ‘भास्कर’ से बातचीत में एस्टा ने बताया कि उन्होंने आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण ले रखा है और यहां इस माहौल में काम करने उन्हें बेहद संतोष मिल रहा है।
साकार हुई गंगा-जमुना तहजीब
जरुरतमंदों की सहायता के लिए शहर के कई संगठन आगे आए। इनमें शहर के अलावा राज्यभर के कार्यकर्ता भी शामिल थे। डेरा सच्च सौदा (हरियाणा) से लगभग 250 कार्यकर्ताओं ने स्वयं को घायलों और परिजनों की सहायता में जुटे रहे। इनमें 20 महिलाएं भी शामिल थीं। इसी तरह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लगभग 1500 कार्यकर्ता घटना की रात से ही मरीजों की हरसंभव सहायता में लगे हुए हैं।
खासकर मुर्दाघर में इनके कार्यो की सभी ने सराहना की। साथ ही सेवा भारती संघ, राजस्थान राज्य स्काउट गाइड, प्रादेशिक सेना, नेशनल कैडेट कोर, संत निरंकारी मंडल, राष्ट्रीय सेवा योजना, नगर निगम जयपुर, राजस्थान रेड क्रास सोसायटी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे संगठनों के साथ ही मुस्लिम संगठनों के कई लोग भी मरीजों की सहायता सहित ब्लड डोनेशन में भी बराबर की भागेदारी की। मरीज के परिजनों से संपर्क साधने के लिए वोडाफोन और रिलायंस फोन सेवा कंपनियों ने नि:शुल्क फोन सेवा उपलब्ध कराई।