जयपुर.
शहर की चारदीवारी में मंगलवार शाम को हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों को लेकर शक की सुई बांग्लादेशी नागरिकों पर घूम गई है। जयपुर में एक महिला समेत 15 लोगों को हिरासत में लिया गया है। संदिग्ध का स्केच जारी कर दिया गया है। इसी ने किशनपोल से मंगलवार दोपहर आठ नई रेंजर साइकिलें खरीदी थीं।
चांदपोल बाजार में बरामद किए गए बम की जांच में पता चला है कि ऐसे ही बम पिछले साल मई में यूपी में हुए विस्फोटों में काम लिए गए थे। मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच दल बनाया गया है।
जयपुर आईजी पीके सिंह ने बताया कि अब तक की जांच में कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगा है, पर बांग्लादेशियों पर शक है।
सीरियल बम विस्फोट प्रशिक्षित आतंकवादियों ने किए लगते हैं, जिसके लिए हूजी, सिमी व लश्कर-ए-तैय्यबा जैसे संगठनों द्वारा बांग्लादेशियों का इस्तेमाल कराए जाने की संभावना है। जांच के एक अन्य पहलू यह भी है कि पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई पहले बांग्लादेशी नागरिकों व आतंकियों को नेपाल के रास्ते भारत में भेजकर अशांति फैलाने की कार्रवाई कर चुकी है।
पुलिस ने बुधवार को बगराना, दिल्ली बाईपास स्थित लक्ष्मण डूंगरी में बसे बांग्लादेशी नागरिकों, पापड़ के हनुमानजी के पास बस्ती व नाहरी का नाका में रहने वाले कुछ संदिग्ध नागरिकों से पूछताछ की और एक महिला समेत 15 लोगों को हिरासत में लिया है। बांग्लादेशी लोगों को पैसे का लालच देकर ऐसी घटनाएं पहले कराई जा चुकी हैं। इसके अलावा शहर के होटलों व धर्मशालाओं को भी छाना गया। उधर, इंदौर में भी 22 संदिग्ध लोगों को इस संबंध में हिरासत में लिया गया है।
जांच दल में कौन-कौन: एडीजी क्राइम एके जैन ने बताया कि उच्चस्तरीय जांच टीम एसओजी के आईजी मेघचंद मीणा के नेतृत्व में बनाई गई है। उसमें एसओजी डीआईजी ए.पौन्नूचामी, डीआईजी (क्राइम) सौरभ श्रीवास्तव, जयपुर शहर (उत्तर) एसपी एचजी राघवेंद्र सुहासा और जयपुर शहर व एसओजी के अन्य अधिकारियों और कर्मियों को शामिल किया गया है।
दो टीमें जयपुर आई: बम विस्फोटों की जांच में दिल्ली, मुंबई, आंध्रप्रदेश व यूपी पुलिस व केंद्रीय गुप्तचर एजेंसियों की सहायता ली जा रही है। पूरे देश में अब तक हुए आतंकी हमलों में इस्तेमाल विस्फोटकों की जानकारी रखने वाले एनएसजी के अधिकारियों की एक टीम मंगलवार देर रात जयपुर पहुंच चुकी है। इसके अलावा यूपी से अधिकारियों की एक टीम बुधवार यहां पहुंच गई है। मुंबई की टीम गुरुवार को और उसके बाद आंध्र प्रदेश की टीम आने की जानकारी मिली है।
अमोनियम नाइट्रेट व आरडीएक्स का प्रयोग : चांदपोल बाजार में मंगलवार रात को मिले जीवित बम में डेढ़ से पौने दो किलो अमोनियम नाइट्रेट व आरडीएक्स भरकर उसे शक्तिशाली बनाया गया था। जांच में सामने आया है कि जिसने यह बम बनाए है, वह काफी एक्सपर्ट है। उसने मारक क्षमता बढ़ाने के लिए सुरंग में किए जाने वाले विस्फोटक की तरह इस बम को सेफ दिया गया।
9 बजे का समय पहेली बना: जीवित बरामद किए गए बम में विस्फोट करने का समय 9 बजे किया हुआ था, जबकि दूसरे बम शाम करीब साढे सात से पौने आठ बजे के बीच ब्लास्ट हुए। जांच टीम के लिए यह समय अभी पहेली बना हुआ है कि आतंकवादी ने इसमें इतनी देर बाद का समय क्यों सेट किया था। एक अंदेशा यह भी है आतंकी समय सेट करते समय भूल हो गई हो या फिर बम रखते समय टाइमर जो कि साधारण कंपनी के टेबल घड़ी से बनाया है, हिलने से समय 9 बजे का हो गया हो।
अलग-अलग जगह से खरीदी साइकिलें: पुलिस जांच में सामने आया है कि रेंजर साइकिलें मंगलवार को किशनपोल बाजार में अलग-अलग दुकानों से खरीदी गई थी। जिस साइकिल पर जीवित बम मिला है, वह मगलवार दोपहर 2:30 बजे खरीदी थी। दुकानदार से पुलिस पूछताछ कर रही है कि साइकिल खरीदने वाले के साथ अन्य व्यक्ति तो नहीं था। इसी दुकानदार की याददास्त के हिसाब से साइकिल खरीदने वाले का स्कैच तैयार कराया गया है।