भोपाल. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को विधानसभा चुनाव से खुद को अलग करने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि चुनाव में मिशन 2008 के तहत पार्टी की दोबारा सरकार बनाना पहला लक्ष्य है। इसे हासिल करने के लिए अध्यक्ष के नाते चुनाव लड़ने के बजाए चुनाव मैदान में डटे पार्टी प्रत्याशियों को जिताना उनका उद्देश्य है।
चुनावी संघर्ष के लिए उन्होंने एक कार्यक्रम भी घोषित किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समापन भाषण में कहा कि आतंकवाद के मजहबीकरण का नतीजा है जयपुर के सीरियल विस्फोट। आतंकवाद के खिलाफ मप्र सरकार के पोटा जैसे सख्त कानून के प्रस्ताव को केंद्र ने हरी झंडी नहीं दी है। आतंक के खिलाफ इस मौके पर निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।..शेष पेज 6 पर
प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक के अंतिम दिन पत्रकारों से चर्चा में श्री तोमर ने यह चौंकाने वाले निर्णय का एलान किया। उन्होंने कहा कि ये उनका निजी निर्णय है और पार्टी इससे सहमत है। ऐसा कर उन्होंने टिकट कटने की स्थिति में शिकायत या विरोध करने वालों का नैतिक रूप से रास्ता बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि आज तो वे टिकट बांटने वालों में शामिल हैं अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियों में मजबूत संगठन के चलते चुनाव लड़ने और जीतने में भी कोई परेशानी है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मगर वे खुद चुनाव लड़ने का मोह त्याग कर एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहते थे ताकि जिनके टिकट कटे वे शिकायत करने के बजाए जो भी उम्मीदवार हो उसके लिए काम करें। इस तरह श्री तोमर ने यह भी संकेत दे दिया कि अगले चुनाव में कई दिग्गजों को टिकट से हाथ धोना पड़ेगा। पत्रकारों से चर्चा के बाद श्री तोमर ने दैनिक भास्कर से चर्चा में कहा कि लोकसभा चुनाव लड़ने या राज्यसभा में जाने की उनकी कोई मंशा नहीं है। चुनाव नहीं लड़ने के निर्णय से वे कार्यकर्ता तो थोड़ा खुश होंगे जो पद नहीं पा सके या जिन्हें हम कोई पद नहीं दे पाए।
इसके अलावा श्री तोमर ने कहा कि कार्यसमिति की बैठक में जयपुर की घटना पर दुख जताते हुए आतंकवाद के लिए केंद्र की सांप्रदायिक नीतियां ज्यादा जिम्मेदार हैं। महंगाई और गैर कांग्रेसी प्रदेश सरकारों के पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाने वाली आतंकवाद के खिलाफ पोटा जैसा कानून हटा कर नरम रुख अपनाया और जयपुर जैसी घटनाएं नतीजे के रूप में सामने हैं।