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सालभर बाद भी नहीं मिला एरियर

इंदौर. राज्य सरकार ने भले ही शिक्षाकर्मियों को अध्यापक बना दिया हो पर इनकी परेशानियां अभी भी कम नहीं हुई हैं। जिले में ऐसे करीब एक हजार अध्यापक हैं, जिन्हें एक साल बाद भी एरियर का पैसा नहीं मिल पाया है।

प्रदेश शासन ने अपनी चुनावी घोषणा को अमल में लाते हुए 1 अप्रैल 2007 को शिक्षाकर्मियों को अध्यापक का दर्जा दिया था। उसके बाद ही प्रति अध्यापक 11 हजार से 20 हजार रुपए एरियर का भुगतान होना था। जिले में इन शिक्षाकर्मियों (अध्यापक) की संख्या तीनों वर्गो में कुल 1667 है, जबकि एक हजार से अधिक शिक्षकों को यह राशि मिलना अभी भी बाकी है।

जिला शिक्षा विभाग के पास 9 अप्रैल 2008 को शासन की ओर से 2 करोड़ 72 लाख रुपए बकाया वेतन और एरियर के भुगतान के लिए जारी हुए थे। विभाग अब तक 1 करोड़ 69 लाख रुपए बांट चुका है, जिसमें एरियर और बकाया वेतन शामिल है। विभाग का कहना है कि हम संकुलों को कई बार सूचना दे चुके हैं, बावजूद इसके वे राशि नहीं ले जा रहे हैं। कई संकुलों में इसकी प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है, फिर भी जैसे-जैसे मांग आती जा रही है हम भुगतान कर रहे हैं।

इन संकुलों में नहीं बंटा पैस

जिले में विशेष रूप से गिरोता, गौतमपुरा (बालक), आटाहेड़ा, गोकलपुर, धन्नड़, बेटमा, महू में कोदरिया, चोरल, जामली, बड़गोंदा, धारनाका, इंदौर में गांधीनगर, खुड़ैल, कनाड़िया, राऊ व हाथीपाला में इस तरह की परेशानी आ रही है।

वसूली का आरोप

राज्य अध्यापक संघ के जिलाध्यक्ष भारत भार्गव व प्रदेश महासचिव संजय सेन ने आरोप लगाया कि संकुल प्रभारियों की लापरवाही और कर्मचारियों द्वारा अवैध वसूली के कारण यह स्थिति बनी है। संघ सार्वजनिक तौर पर विवेकानंद स्कूल में कार्यरत एक यूडीसी द्वारा की गई अवैध वसूली की दस्तावेजों के साथ शिकायत कर चुका है। श्री भार्गव ने कहा यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।





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