जयपुर.
सीरियल बम धमाकों ने कहीं मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया, तो किसी मां का आंचल सूना कर दिया। बुधवार भास्कर संवाददाता ने जाने मृतकों के परिजनों के हाल।
पथराई आंखों में बेटे के आने का इंतजार : चांदपोल बाजार स्थित बगरू वालों का रास्ता निवासी चंदा देवी(48) की पथराई आंखों में अभी भी बेटे का इंतजार है। त्रिपोलिया बाजार में हुए बम विस्फोट में मौत का शिकार किशन (18) का नाम लेते ही उसकी मां चंदा देवी फूट-फूट कर रोते हुए कहने लगी- अभी किशन काम से लौटकर आएगा व मुझसे खाना परोसने के लिए कहेगा। यह बात सुनते ही किशन के घर में मौजूद अन्य परिजनों की चीत्कारें निकल पड़ी। किशन का बड़ा भाई दीपक सुबकते हुए कहने लगा कि हम पांच भाइयों में किशन तीसरे नंबर का था। वही स्थायी रोजगार में था, जिससे पूरे परिवार का खर्चा चलता था।
दो मासूमों के सिर से उठा पिता का साया : नाहरगढ़ रोड निवासी मुकेश तिवाड़ी अपने दो मासूम बच्चों और पत्नी अर्चना को सदा के लिए छोड़ कर चले गए। जहां एक ओर आयुष व अभिनव अपने पिता की मौत से अनभिज्ञ हैं, वहीं अर्चना अचानक हुए हादसे से उबर नहीं पाई है। बड़े भाई केशव ने बताया कि मुकेश करीब 25-30 वर्र्षो से चांदपोल हनुमान के दर्शन करने जाता करता था। मंगलवार को भी वह मंदिर में प्रसाद चढ़ाने गया था, लेकिन लौटकर नहीं आया।
पिता व भाई खोए : चांदपोल हनुमान मंदिर के बाहर हुए धमाके ने बालाजी का रास्ता निवासी कमल खनकवाल से उसके पिता व भाई को भी छीन लिया। कमल ने बताया कि मंदिर के बाहर फूल-माला का व्यवसाय करने वाले उसके पिता रामप्रसाद व दोनों भाई राजकुमार (34) व गोविंद (28) दुकान गए थे, जहां विस्फोट से उसके पिता व भाई राजकुमार की मौत हो गई। छोटे भाई गोविंद के पैर में चोटें आई है। कमल ने भरभराई आवाजा में बताया कि अभी तक उसके भाई राजकुमार का पता नहीं लग पाया है, जबकि वह दो बार एसएमएस अस्पताल में पूछताछ कर चुका है।
धमाकों ने सब कुछ छीन लिया
मालवीय नगर निवासी कौशल्या धवन जौहरी बाजार स्थित हनुमान मंदिर में हुए बम विस्फोट के दौरान मृत्यु हो गई। उनके पति सतीश धवन ने बताया कि वह नियमित रूप से हनुमान मंदिर जाते है। मंगलवार को वह पत्नी के साथ मंदिर गए। मंदिर में हुए बम धमाकों की चपेट में पत्नी के सिर में चोट लगी और उनके भी पीठ पर हल्की चोट आई है। उन्होंने कहा कि बम धमाकों ने उनका सब कुछ लूट लिया। अब उनके परिवार में दो बेटियां है। उनका अंतिम संस्कार आदर्श नगर स्थित शमशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। जिसमें कॉलोनी के सैकडों लोगों ने भाग लिया।
नियमित जाता था मंदिर
ब्रrापुरी निवासी हरीश आडवाणी भी धमाकों में काल का ग्रास बन गए। पिता तीर्थदास आडवाणी ने बताया कि हरीश नियमित रूप से हर मंगलवार सांगानेरी गेट स्थित हनुमानजी के मंदिर जाता था। वह अपने भाई को कहकर गया था कि वह मंदिर में दर्शन करने जा रहा है और आधे घंटे में लौट आएगा, लेकिन क्या पता था कि वह लौटेगा ही नहीं। धमाके के समय हरीश मंिदर की सीढ़ियों पर प्रसाद लेने के लिए चढ़ा ही था कि धमाके रूपी मौत ने उसे अपने आगोश में ले लिया। यह कहते ही तीर्थदास की आंखें भर र्आई। परिवार में हरीश के दो पुत्र व एक छोटा भाई हैं।