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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
आंबेडकर अस्पताल में सुबह 11 बजे अचानक बिजली गुल हो गई। उस समय अस्पताल के मुख्य आपरेशन थियेटर(ओटी) के साथ-साथ ट्रामा यूनिट के ओटी में आपरेशन चल रहे थे। बिजली फेल होने के बाद पता चला कि ट्रामा का जनरेटर खराब है। जनरेटर की हकीकत उजागर होते ही डाक्टरों के हाथ-पांव फूल गए। मरीजों का आपेरशन अधूरी स्थिति में छोड़ा नहीं जा सकता था। ऐसे हालात में डाक्टरों ने गैस बत्ती जलवाकर उसकी रोशनी में आपेरशन किया।
आपरेशन के दौरान मरीज आशिया परवीन(36) के रिश्तेदारों के साथ-साथ डाक्टरों की भी सांस तेज चल रही थी। कम रोशनी में किसी तरह की चूक के अंदेशे से डाक्टर परेशान थे। आपरेशन करने में दो घंटे लग गए। दोपहर 1 बजे के बाद जब आपरेशन के बाद मलहम पट्टी की जा रही थी, तब बिजली आई। उसके बाद डाक्टरों की जान में जान आई। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि गैस बत्ती की रोशनी में जिस मरीज का आपरेशन किया गया वह (आशिया) बुधवार को सुबह ही एक हादसे का शिकार हो गई थी। उसके सिर और हाथ-पांव में गहरी चोट आई हैं। हादसे के फौरन बाद उसे आंबेडकर अस्पताल लाया गया।
उस समय मुख्य ओटी में सामान्य आपरेशन हो रहे थे। डाक्टरों ने मरीज की दशा देखते हुए तुरंत आपरेशन की तैयारी की और ट्रामा सेंटर में आपरेशन किया गया। आशिया का तो जैसे तैसे इलाज हो गया, लेकिन बिजली गुल होने के बाद आने वाले आधा दर्जन से ज्यादा गंभीर मरीज घंटों तड़फते रहे। वसुधरा गांव से कृपा राम (17) को दोपहर 12 बजे आंबेडकर अस्पताल लाया गया। युवक के सिर पर गहरी चोट थी। शरीर के कई हिस्सों से खून बह रहा था। अंधेरे के कारण डाक्टरों ने उसे छुआ तक नहीं। नई राजधानी स्थित ग्राम पौंता से सरोज कुमार को जब लाया गया तो वह पीड़ा से तड़प रहा था।
उसे अपेंडिक्स के दर्द का अटैक आया था। बिजली आने तक वह कराहते हुए तड़पता रहा, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। बेमेतरा से राजीव वर्मा को भी बुरी तरह जख्मी अवस्था में लाया गया। मरीज के परिजनों ने जब जमकर हंगामा किया, तब डाक्टरों ने उसे दाखिल किया। अस्पताल में भर्ती करने की औपचारिकता पूरी करने के बाद डाक्टरों ने उसे उसी हालत में छोड़ दिया था। बिजली आने के बाद ही उसका प्रारंभिक इलाज शुरु हुआ। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ट्रामा सेंटर के कई वरिष्ठ डाक्टरों यहां तक कि आपात चिकित्सा अधिकारी तक ने अस्पताल प्रशासन को कई बार जानकारी दी। मरीजों की दशा और उनके रिश्तेदारों के हंगामे की सूचना देकर जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाया भी गया, लेकिन कोई झांकने तक नहीं आया।
जनरेटर 15 दिनों से खराब
अस्पताल में दो-दो जनरेटर हैं। एक जनरेटर मुख्य आपरेशन थियेटर और वार्ड में बिजली सप्लाई करने के लिए आरक्षित है। दूसरा जनरेटर ओपीडी और ट्रामा सेँटर के लिए रखा गया है। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि ट्रामा सेंटर को इमरजेंसी में बिजली सप्लाई करने वाला जनरेटर करीब दो हफ्ते से खराब है। अस्पताल प्रशासन को खबर दी गई है, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। उसका खामियाजा बुधवार को मरीजों को भुगतना पड़ा।