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बिना मान्यता वाले कोर्स मेडिकल कालेजों में न चलाएं

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य शासन को आदेश दिया है कि वह प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमसीआई की मान्यता न होने वाले कोर्स आगामी सत्र से न चलाए।

मेडिकल कॉलेजों में कोर्स चलाने के लिए एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) की मान्यता की जरूरत पड़ती है। गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर में वर्ष 1978 से एमएस आर्थोपेडिक कोर्स एमसीआई की बगैर मान्यता के चल रहा था। वर्ष 2004-05 में मप्र के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेन्ट प्रोफेसर पद की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया था।

विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता एमसीआई द्वारा निर्धारित मांगी गई थी। अभ्यर्थी डा. ओपी लखवानी ने आवेदन कर जीआर मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक विभाग में असिस्टेन्ट प्रोफेसर पद पर पदस्थापना मांगी थी, लेकिन यहां डा. संदीप नेमा की नियुक्ति की गई जबकि डा. लखवानी को रीवा में। डा. संदीप नेमा की यहां पदस्थापना को डा. लखवानी ने ग्वालियर खंडपीठ में याचिका लगाकर चुनौती दी। याचिकाकर्ता का कहना था कि डा. नेमा के पास एमसीआई द्वारा एमएस आर्थोपेडिक की डिग्री मान्य नहीं हैं, इसलिए इनकी पदस्थापना नहीं हो सकती।

न्यायालय ने डा. संदीप नेमा की नियुक्ति को सही माना और राज्य शासन और मप्र की एमसीआई को इस निर्देश के साथ याचिकाकर्ता डा. लखवानी की याचिका को खारिज कर दी कि अगले सत्र से एमसीआई की बिना मान्यता वाले कोर्स प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में न चलाए जाएं। राज्य शासन की ओर से पैरवी विवेक खेड़कर ने की।





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