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महिलाओं ने बनाया विकास का नक्शा

ग्वालियर. डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी) के दल ने बुधवार को हुरावली बस्ती का जायजा लिया। कम्युनिटी डेवलप प्रोग्राम के तहत विकसित की जा रही इस बस्ती की महिलाओं ने निरीक्षण दल को उनके द्वारा तैयार किया गया विकास का नक्शा दिखाया, दल के सदस्यों ने इसे देख संतोष व्यक्त किया।

डीएफआईडी के दिल्ली से आए प्रतिनिधि गवर्न्ेस एडवाइजर आरफ गौरी और अर्बन एडवाइजर देवश्री मुखर्जी एवं भोपाल में पदस्थ लंदन के सीनियर कंसल्टेंट डा. रिचर्ड स्लेटर तथा उर्वी मनकड ने निगम अधिकारियों के साथ हुरावली तथा मुरार स्थित उपायुक्त कार्यालय का निरीक्षण किया। सबसे पहले निरीक्षण दल मुरार उपायुक्त कार्यालय पहुंचा। यहां मौजूद उपायुक्त डा. प्रदीप श्रीवास्तव ने हाल में निगम द्वारा किए गए कार्य विभाजन की जानकारी दी।

हुरावली का निरीक्षण करने पहुंचे दल ने यहां के निवासियों से चर्चा कर उनकी प्राथमिकताएं जानने का प्रयास किया। इस पर क्षेत्र में निगम द्वारा तैयार किए गए महिलाओं के एक समूह ने उन्हें बस्ती के विकास के लिए तैयार की गई प्लानिंग से अवगत कराया। क्षेत्रीय निवासियों के अनुसार बस्ती की प्राथमिकता पेयजल और सेनीटेशन रहेगी।

संस्थागत सुधार दिखा

डीएफआईडी के सदस्यों ने नगर निगम में जो संस्थागत सुधार देखा, उससे वे संतुष्ट दिखाई दिए। इस मामले में बात करने पर उर्वी मनकड ने कहा कि उपायुक्त कार्यालयों की व्यवस्था से लोगों को काफी लाभ मिलेगा और वे निगम संबंधी अपनी समस्याओं का निराकरण अपने क्षेत्र के उपायुक्त कार्यालय पर करा सकेंगे।

पांच बस्तियों का होगा विकास

डीएफआईडी द्वारा मध्यप्रदेश गरीबोन्मुखी कार्यक्रम के तहत शहर की पांच बस्तियों का विकास पहले चरण में किया जाएगा। इनमें हुरावली के अलावा हाथीखाना, गुड़ी ऊपर, रानीपुरा तथा जगनापुरा शामिल हैं। शहर में पांच सालों में लगभग आधा सैकड़ा बस्तियों का विकास कार्य कराया जाएगा। इसमें खर्च होने वाली 65 करोड़ रुपए की राशि डीएफआईडी द्वारा अनुदान के रूप में दी जाएगी।

निगम मुख्यालय में हुई समीक्षा

डीएफआईडी की योजना के तहत शहर में कराए जाने वाले विकास कार्र्यो की तैयारियों की समीक्षा के लिए निगम कार्यालय में बैठक का आयोजन किया गया। दोपहर बाद से देर शाम तक निरीक्षण दल के सदस्य तथा निगम अधिकारी मुख्यालय में रहे। बैठक में मेयर-इन-काउंसिल के सदस्यों ने गंदी बस्तियों के चयन पर आपत्ति जताई। कुछ पार्षदों ने यह भी कहा कि बस्तियों के विकास कार्र्यो में दिखावा ज्यादा और काम कम है।





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