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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
परिवहन विभाग ने कामकाज में तेजी लाने के लिए अपनी पुर्न्सरचना का नया प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए शासन को भेज दिया है। अपर मुख्य सचिव विनोद चौधरी ने प्रस्ताव का परीक्षण करने के निर्देश परिवहन विभाग के अधिकारियों को दिए हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था में मध्यप्रदेश परिवहन विभाग को कार्यपालिक व अकार्यपालिक 2592 पदों के लिए 2590 लाख रुपए का सालाना व्यय उठाना होगा। वर्तमान में पदस्थ 1349 अधिकारी, कर्मचारियों पर विभाग अभी 1438 लाख रुपए वार्षिक व्यय कर रहा है। इस प्रकार अभी तक 710 करोड़ रुपए का वार्षिक राजस्व अर्जित करने वाले परिवहन विभाग का व्यय 2.09 प्रतिशत से बढ़कर 3.73 फीसदी हो जाएगा। वित्तीय वर्ष 2008-09 में राजस्व का लक्ष्य बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है कि इसलिए मोटरयान कर की वसूली के लिए े अमले में इजाफा करना होगा।
अधिकारी-कर्मचारियों की आवश्यकता को प्रतिपादित करते हुए पुर्न्सरचना के प्रस्ताव में कहा गया है कि वर्ष 1989 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के समय मध्यप्रदेश परिवहन विभाग ने 362 कर्मचारियों को नए राज्य के लिए स्थायी रूप से ट्रांसफर कर दिया था। इसी के साथ वेतन आयोग की अनुशंसा पर विभागीय अमले के 86 पद सरेंडर भी किए थे।
वर्ष 2000 में भी 69 पद सरेंडर करना पड़े। इन्हीं कारणों से परिवहन विभाग में अधिकारी, कर्मचारियों की कमी चल रही है जिससे कामकाज प्रभावित है। प्रस्ताव में राजस्थान के परिवहन मुख्यालय की स्टाफ संख्या का जिक्र करते हुए शासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया है कि वहां 21 अधिकारियों का स्टाफ है जबकि मध्यप्रदेश में सिर्फ 11 का। इंदौर व जयपुर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों की स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि इंदौर में एक आरटीओ ,दो एआरटीओ व चार परिवहन निरीक्षकों ने मिलकर बीते वर्ष 2007-08 में 115.19 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया है, वहीं जयपुर के 29 कर्मचारियों के आरटीओ अमले ने 151.74 करोड़ रुपए का राजस्व वसूला है।