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दीया गुल, खो गई महक

जयपुर. grirl गरीबों को प्रसाद बांटने चांदपोल हनुमानजी मंदिर गई दो मासूम बच्चियां भी दहशतगर्दो की खूनी कार्रवाई की शिकार हो गई। ये बच्चियां अपनी मर्जी से दादी के साथ मंगलवार को गरीबों में प्रसाद बांटने गईं थीं और वहां हुई भगदड़ में घायल हो गईं।

माता-पिता को दोनों बच्चियां सवाई मानसिंह अस्पताल में मिलीं, लेकिन उनकी दिल की धड़कनें तब तक शांत हो चुकी थीं। सचिन गुप्ता और उनकी पत्नी की तो जैसे जिंदगी ही खत्म हो गई। नाज-नखरों से पली इन दोनों बहनों में इस कदर प्यार था कि एक-दूसरे के बगैर रह ही नहीं पाती थी।

पैलेस स्कूल की साढ़े पांच साल की महक गंभीर थी। बस दिन में टीवी पर काटरून से चिपके रहना ही उसे पंसद था। विद्याश्रम स्कूल में पढ़ने वाली दीया पढ़ाई में भी काफी होशियार थी। अपने दादा-दादी, नाना-नानी की लाड़ली थी दोनों बेटियां। दोनों को पूरा घर लाड़ करता था, क्योंकि पूरे परिवार में सिर्फ सचिन की ही लड़कियां थी। बाकी दोनों भाइयों के दो-दो लड़के हैं।





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