अमृतसर. पाकिस्तान के पूर्व मानवाधिकार मंत्री और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति के सलाहकार अंसार बर्नी ने कहा कि सरबजीत मामले में वह गृह, विदेश और कानून मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क में हैं। ये सभी उन्हें सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
फोन पर भारत से ‘ट्रांसफर ऑफ अफैंडर्स ट्रीटी’ की पाकिस्तान की ओर से रखी गई ‘शर्त’ को नकारते हुए उन्होंने पूछा कि ‘क्या कश्मीर सिंह को समझौते के तहत रिहा किया गया था।’ उन्होंने कहा कि भारतीय जेलों में बंद पाकिस्तान के कैदियों को छोड़ने की बात तो सरबजीत की रिहाई से पहले से ही हो रही है। भारत अगर ऐसा करेगा तो निश्चित रूप से एक और सकारात्मक माहौल बनेगा, लेकिन इसके लिए शर्त जैसी कोई बात नहीं है।
भारत-पाक दोनों को सजा पूरी कर चुके कैदियों को छोड़ना चाहिए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने भी बातचीत में भारत से मानवीय रुख अपनाने के लिए कहा था। पाकिस्तान में हुई उच्च स्तरीय बैठकमें सरबजीत की फांसी की माफी के विरोध पर उन्होंने कहा किउन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
अगर ऐसा हुआ है तो ये अस्वाभाविक नहीं है, लेकिन अब अधिकतर लोग सरबजीत के हक में हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही कोई सुखद समाचार मिलेगा।