News
International International इस्लामाबाद. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी [पीपीपी] के सहअघ्यक्ष आसिफ अली जरदारी ने स्वीकार किया है कि उनकी पार्टी को जज मुद्दे पर भारी कीमत चुकानी पड़ रही है, लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इस मसले से देश में कोई संकट खड़ा हो गया है।
जरदारी ने मुरी घोषणा पत्र के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि अपदस्थ जजों की बहाली का प्रस्ताव संसद के संयुक्त अधिवेशन में पटल पर रखा जाएगा। पीपीपी सहअघ्यक्ष ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हम मुरी घोषणा पत्र के संकल्प से बंधे हैं तथा जजों की बहाली के लिए प्रस्ताव का मसौदा तैयार कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया पर नाजुक दौर से गुजर देश के समक्ष इस मुद्दे को संकट की तरह पेश करने का आरोप लगाया।
जजों की बहाली की समय सीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि राजनीति में इस तरह की समय सीमाएं नहीं होती हैं। जरदारी ने कहा कि वे नहीं चाहते कि सरकार के लिए एक बार फिर उलटी गिनती शुरू हो जाए। उन्होंने कहा कि पीपीपी ने ही सबसे पहले जजों की बहाली के लिए आंदोलन शुरू किया था और कई कुरबानियां दी थीं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज [पीएमएल-एन] मंत्रिमंडल से हटने के बावजूद गठबंधन में बना रहेगा। उन्होंने कहा कि पीपीपी को हालांकि गठबंधन सरकार चलाने के लिए साधारण बहुमत प्राप्त है, लेकिन वह नवाज शरीफ को हरहाल में साथ रखना चाहते हैं।
संबंधित खबरें
* पाक : नौ मंत्रियों के इस्तीफे
* शरीफ से बातचीत की कोशिश जारी:जरदारी
* पाक: सरकार के गले की फांस बनी जजों की बहाली
* नहीं निकला जजों की बहाली का हल