कोलकाता
फ्लैश बल्ब की रोशनी में एक ने अपनी नन्हीं-सी आंखें मिचमिचाई तो दूसरा सारे शोरगुल से बेखबर गहरी नींद में सोता रहा। दोनों को नहीं पता था कि उन्होंने भारत के चिकित्सा इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। उनकी मां सरबनी पाल देश की ऐसी पहली महिला हैं, जिसने 52 वर्ष की आयु में रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है।
35 साल पहले सरबनी का
विवाह
आसनसोल के सीतल दास (अब 60 साल के) से हुआ था और तभी से वे मां बनने की हसरत पाले थीं, लेकिन उन्होंने उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ा।
उम्मीद की किरण :
कई साल तक भटकने के बाद दंपती ने गत वर्ष भागीरथी नेओतिया बाल एवं महिला केंद्र द्वारा संचालित जीनोमी फर्टिलिटी क्लीनिक में जांच कराई। सरबनी को मेनोपॉज हुए काफी समय गुजर चुका था, इसलिए इनव्रिटो फर्टीलाइजेशन एकमात्र विकल्प था। उनके पति सीतल दास का स्पर्म काउंट बहुत कम मिला, इसलिए इंट्रा साइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (इक्सी) की सलाह दी गई।
कैसे मिली सफलता :
दंपती की सहमति के बाद डोनर महिला के एचआईवी सहित सभी जरूरी टेस्ट किए गए। डोनर महिला से अंडाणु लेने के बाद उसमें महिला के पति के स्पर्म का कृत्रिम निषेचन कराया गया। इससे तैयार भ्रूण को टिश्यू कल्चर में रखा गया। बाद में इन्हें सरबनी के गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया गया। करीब 8 माह तक गर्भधारण के बाद सरबनी ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया।
हमने देश के मेडिकल रिकॉर्ड का पता लगाया, जिसमें मेनोपॉज के बाद किसी भी महिला द्वारा जुड़वां बच्चों को जन्म देने का उदाहरण नहीं मिला।
-डॉ. रंजीत चक्रवर्ती, गायनोकोलॉजिस्ट
दंपती को पूरी तकनीकी प्रक्रिया बताने के साथ यह भी पूछा कि क्या वे शारीरिक रूप से बच्चों के पालन-पोषण में सक्षम है। लेकिन दोनों अपने फैसले पर दृढ़ थे।
- डॉ रोहित गुतगुतिया, आईवीएफ सलाहकार, जीनोमी फर्टिलिटी सेंटर