इंदौर. हाई कोर्ट ने दो पुलिस अफसरों द्वारा युवक से मारपीट के मामले में निचली अदालत के फैसले को यथावत रखा है। बस इतनी रियायत दी है कि निचली अदालत जेल भेजे तो जमानत के लिए समय दिया जाए।
ये अफसर हैं विनीत कपूर एसपी, पीटीएस पचमढ़ी और बी.जे. सालुंके सीएसपी इंदौर। विनोबानगर निवासी प्रमोद रामदयाल बौरासी ने 2002 में जेएमएफसी एनके जैन की अदालत में तत्कालीन सीएसपी श्री कपूर व टीआई पलासिया श्री सालुंके के खिलाफ परिवाद लगाया था। उसमें कहा गया था प्रदर्शन में शामिल होने से पुलिस पलासिया ने बंदी बनाया था।
जमानत होने के बाद शाम को टीआई फिर थाने लाए, पीटा और दीवार से टकरा दिया जिससे कान का पर्दा फट गया। कोर्ट ने पुलिसकर्मियों व डॉक्टर आदि के बयान लेने और रिकॉर्ड देखने के बाद दोनों अफसरों पर केस दर्ज कर जमानती वारंट भी जारी किए। इस पर पुलिस अफसरों ने सेशन जज पीके गोधा के समक्ष रिविजन याचिका लगाई जो 06 में खारिज कर दी गई। फिर मार्च 06 में धारा 482 के तहत हाई कोर्ट इंदौर में याचिका लगाई।
वहां से स्टे मिलने पर वारंट की कार्रवाई रुक गई। 2007 में एक सुनवाई पर दोनों अफसर और उनके वकील कोर्ट नहीं आए। उसी दिन हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। अफसरों ने फिर आवेदन लगाया कि सुनवाई की तिथि पता नहीं होने से हाजिर नहीं हो सके थे उनका आवेदन पुनस्र्थापित किया जाए। हाई कोर्ट ने स्थगन जारी रखा। इसी 26 अप्रैल को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति ने याचिका ही निरस्त कर दी।