इंदौर. शहर में बिक रहे खुले दूध में हो रही मिलावट पर प्रशासन का ध्यान नहीं है। इसका फायदा दूध विक्रेता उठा रहे हैं। गांव से चलते समय या शहर में कहीं इसमें पानी मिला दिया जाता है। खराब पानी की मिलावट से बीमारियां फैलने की आशंका भी रहती है।
हर साल गर्मी में दूध के नमूने लिए जाते रहे हैं लेकिन इस बार खाद्य एवं औषधि प्रशासन में नौ में से एक ही इंस्पेक्टर पदस्थ है। बाकी सारे पद खाली है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का दूसरे विभागों से तालमेल नहीं होने की भी बात कही जा रही है। सुदामानगर निवासी गृहिणी शिल्पा जोशी ने बताया कुछ दिनों से दूध में पानी की मात्रा ज्यादा लगी तो दूधवाला ही बदल दिया। अब वह भी पानी की मिलावट ज्यादा कर रहा है।
नापतौल निरीक्षक अजित श्रीवास्तव स्वीकारते हैं दूध में मिलावट की शिकायतें तो कई आ रही हैं लेकिन इस बार माहौल ही नहीं बना। हम जल्द ही नापतौल की जांच शुरू करेंगे। इंदौर दुग्ध संघ ने भी पिछले साल शहर के कई स्थानों पर दूध की क्वालिटी जांचने के लिए लोगों से नमूने जुटाए थे लेकिन इस बार रुचि नहीं दिखाई।
दुग्ध संघ के क्वालिटी कंट्रोल विभाग के मैनेजर आर.के. महाजन बताते हैं पिछले साल लिए नमूनों में से 80 प्रतिशत मिलावटी थे। ज्यादातर में पानी की मात्रा ज्यादा थी। इस वर्ष कर्मचारियों की कमी व मशीन की देखरेख पर किया जाने वाला व्यय परेशानी का सबब बन रहा है। सीएमएचओ डॉ. शरद पंडित ने बताया हम जल्द ही अन्य विभागों की मदद से मुहिम चलाएंगे।