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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. जिला प्रशासन की मध्यस्थता के बाद भी आईटीआई प्रशिक्षु संघ और एसईसीएल के बीच चर्चा सार्थक नहीं हो सकी जिससे प्रशिक्षु संघ का आमरण अनशन 9वें दिन गुरुवार को भी जारी है। संघ ने निर्णय लिया है कि जब तक उन्हें एसईसीएल नियुक्ति नहीं देता तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
गौरतलब है कि आईटीआई प्रशिक्षु संघ के सदस्य व पदाधिकारी विगत 7 मई से आमरण अनशन कर रहे हैं। संघ का कहना है कि वर्ष 1996-97 में रोजगार कार्यालय के माध्यम से एसईसीएल ने आईटीआई पास युवकों को बतौर प्रशिक्षु काम पर लिया था। इसमें ट्रेनिंग के बाद उन्हें विभिन्न खदानों में नियुक्त किया गया। कोल माइंस अधिनियम 1966 के तहत उस समय 3880 आईटीआई प्रशिक्षुओं को नियमित किया गया था, लेकिन शेष प्रशिक्षुओं को इससे वंचित कर दिया गया।
न्यायालय ने वंचित लोगों की याचिका पर उन्हें मजदूर ग्रेड-1 में लेने का आदेश दिया था। एसईसीएल प्रबंधन ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इसमें भी प्रशिक्षुओं के पक्ष में आदेश आया। बावजूद इसके एसईसीएल ने आज तक इस आदेश का पालन नहीं किया। इसके बाद से आज तक 4 सौ प्रशिक्षु बेरोजगार नौकरी पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। प्रशिक्षु संघ की मांग है कि उन्हें अविलंब एसईसीएल नौकरी दे।
इस मामले को लेकर जिला प्रशासन ने मध्यस्थता करते हुए दो दिन पहले एसईसीएल प्रबंधन के अधिकारी और प्रशिक्षु संघ के लोगों की बैठक बुलाई थी। इसमें अपर कलेक्टर श्री एल्मा की उपस्थिति में चर्चा हुई, लेकिन इस बातचीत से कोई हल नहीं निकल सका, जिससे एसईसीएल मुख्यालय के सामने प्रशिक्षु संघ का आमरण अनशन आज 9 वें दिन भी जारी है। संघ की ओर से यदुवंत सिंह और अंजनी प्रसाद पटेल आमरण अनशन पर बैठे हैं।
हालांकि एसईसीएल प्रबंधन ने जिला प्रशासन की मध्यस्थता में हुई चर्चा में यह जानकारी प्रस्तुत की थी कि उन्होंने इस संबंध में कोल मंत्रालय को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति की जानकारी भेज दी है और वहां से स्वीकृति मिलने के बाद ही एसईसीएल भर्ती के संबंध में निर्णय ले सकेगा। मगर प्रशिक्षु संघ इससे संतुष्ट नहीं है और नियुक्ति होते तक आंदोलन जारी रखने के मूड में है।
भर्ती की स्वीकृति मिलने तक अवैतनिक नौकरी दे एसईसीएल
संघ के अध्यक्ष गणोश प्रसाद तिवारी एवं सदस्यों का कहना है कि जब तक कोल इंडिया से भर्ती की स्वीकृति नहीं मिल जाती, तब तक एसईसीएल हमें बगैर वेतन के काम पर ले। चाहे स्वीकृति मिलने में कितने ही साल क्यों न लग जाएं, हम तब तक बिना वेतन के काम करेंगे।