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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
शिवपुरी के मड़ीखेड़ा में जलाशय बनाने के लिए हुए वृक्षों की कटाई का मामला फिर गरमा गया है। निचली जांचों से असंतुष्ट होने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक वीआर खरे ने वरिष्ठ अधिकारियों का जांच दल बना दिया है। इस जांचदल में शिवपुरी वन वृत्त के स्थान पर ग्वालियर वृत्त के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
मड़ीखेड़ा में जलाशय बनाने के लिए शासन ने डूब क्षेत्र में आने वाले जंगल को काटने का निर्णय लिया था। उस समय तय हुआ था कि पेड़ों को जमीनी सतह के बराबर काट दिया जाए। यह जिम्मेदारी वन महकमे को दी गई थी। वन महकमे के तत्कालीन अधिकारियों ने कंपाउंड में पहले से मौजूद पेड़ों की संख्या कम बताई और ज्यादा की कटाई कर दी। लकड़ी डिपो पर मोटी-मोटी डालें पहुंचाई गईं, जबकि मोटे तने गुपचुप तरीके से बेच दिए गए। यह काम वर्ष 2002-2006 तक निरंतर चलता रहा।
सूत्रों के मुताबिक, शिकायतें आने पर पहले निचले स्तर पर जांच कराई गई। बाद में मामला विधानसभा तक भी जा पहुंचा। इस मामले की पूर्व विधायक नरेंद्र बिरथरे ने लोकायुक्त से शिकायत की थी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक बीआर खरे ने जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच दल गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने 21 मई तक कटे पेड़ों की गिनती का काम पूरा करने को कहा गया है। जांच दल में अध्यक्ष एलआर बुरडक मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन), सदस्य आरबी सिन्हा वन संरक्षक ग्वालियर वृत्त, सदस्य जयप्रकाश नारायण वन संरक्षक अनुसंधान एवं विस्तार ग्वालियर को शामिल किया है। इसके अलावा टीम के सहयोग के लिए पांच टीम लीडर भी बनाए गए हैं। इनमें एसडीओ जीपी तिवारी, एसडीओ सबलगढ़ ओपी श्रीवास्तव, एससी भदौरिया अधीक्षक चंबल सफारी मुरैना, वायजी गोस्वामी सब वृत्त कार्यालय ग्वालियर व एके दुबे दतिया को शामिल किया गया है। टीम लीडर के अलावा नौ रेंजर, 9 फोरेस्टर, 34 फोरेस्ट गार्ड को शामिल किया गया है।
जांच में शामिल मुद्दे
मड़ीखेड़ा डूब क्षेत्र में चिन्हांकित वृक्ष, विदोहित वृक्ष तथा आकलित वनोपज उत्पादन एवं वास्तविक वनोपज उत्पादन क्या था? परिवहन की गई वनोपज एवं निर्वर्तन की गई वनोपज की जानकारी भी जांच में ली जाएगी । यह जांच दल 31 मई 2008 तक अपना प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपेगा।
गुमराह कर रहे हैं अधिकारी
मड़ीखेड़ा में जंगल को वन अधिकारियों ने नष्ट कर दिया। ज्यादा लकड़ी काटकर बेच दी गई। इसमें काफी गोलमाल हुआ है। इसकी जानकारी डीएफओ से सूचना के अधिकार के तहत मांग रहे हैं तो वे गुमराह करने में लगे हुए हैं।
नरेन्द्र बिरथरे, पूर्व विधायक