संपादकीय. भारत में आतंकवाद के जो तार सीमापार से जुड़े हैं, उन्हें अंजाम देने वाले हाथ और नाम अब इसी देश में रह रहे लोगों के होंगे। मंगलवार की शाम को जयपुर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की जिम्मेदारी फिलहाल एक नए संगठन ‘इंडियन मुजाहिदीन’ ने ली है। यह भी लगभग तय हो चुका है कि विस्फोट से पहले का जो वीडियो इस संगठन ने जारी किया है, वह असली है।
सीधा अर्थ है कि इस आतंकवादी हमले के पीछे जिस नए संगठन को सामने लाया गया है, उसकी रणनीति काफी सोच-समझकर बेहद चालाकी से बनाई गई है। जाहिर है कि भारत में आतंकवाद की लड़ाई अब ‘इंडियन मुजाहिदीन’ के नाम से लड़ने का ताना-बाना तैयार किया गया है। संभवत: इस नए नाम को स्थापित करने के लिए ही जयपुर को निशाना बनाने की कोशिश की गई। यानी अभी तक आतंकवाद का जो अंतरराष्ट्रीय चेहरा पड़ोसी देशों के रूप में दिखाई दे रहा था, उसे शुद्ध भारतीय पहचान देने की कोशिश की जा रही है।
यह भी स्पष्ट हो गया है कि आईएसआई या अल-कायदा अब हमारे यहां ऐसा नेटवर्क बनाने में कामयाब हो गए हैं, जिसमें स्थानीय लोगों का अधिकाधिक इस्तेमाल करने की योजना को अमल में लाया जा सकेगा। इन भारत-विरोधी तत्वों को इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत के खिलाफ जो आतंकवाद की लड़ाई अभी बाहर से चल रही थी, उसे स्थानीय मुखौटा मिल जाएगा और योजनाएं तथा धन सीमापार से आता रहेगा।
हालांकि इस बात पर राहत महसूस की जा सकती है कि जयपुर के ताजा धमाकों में सांप्रदायिकता का मुद्दा नेपथ्य में ही रहा, लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि नए आतंकवादी संगठन की गतिविधियों को गंभीरता से न लिया जाए। इस संगठन ने अपने ई-मेल में जिस तरह की चेतावनी दी है उसके निहितार्थ बेहद बारीकी से देखने होंगे।
संभवत: अब तक आतंकवादियों की योजनाओं को लेकर खुफिया तंत्र की असफलता इसलिए सामने आती रही है, क्योंकि पहले से ही अल-कायदा, लश्कर-ए-तोयबा या हूजी अथवा आईएसआई पर शक जाहिर करके मामलों को अंतरराष्ट्रीय चश्मे से देखने की आदत बना ली गई है।
मौजूदा विस्फोटों में उभरकर आए इस नए संगठन ‘इंडियन मुजाहिदीन’ के मायने में सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है, क्योंकि भारत में आतंकवाद के जो तार सीमापार से जुड़े हुए हैं, उन्हें अंजाम देने वाले हाथ और नाम इसी देश में रह रहे लोगों के होंगे।
भले ही वे लोग सीमापार करके हमारे यहां आ रहे हों, इसलिए आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों को यह समझना होगा कि जब राजस्थान, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र से लेकर दक्षिण के राज्यों तक आतंकवादी बेखौफ अपनी गतिविधियों को चलाने में कामयाब हो रहे हों, तो उनका स्थानीय नेटवर्क किस स्तर पर काम कर रहा होगा।