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सिखों के स्टेट्स पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे

चंडीगढ़सुप्रीम कोर्ट ने वीरवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें पंजाब में सिखों को अल्पसंख्यक मानने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने एसजीपीसी के शिक्षण संस्थानों में सिखों के लिए 50 फीसदी आरक्षण के प्रावधान वाली पंजाब सरकार की अधिसूचना रद्द कर दी थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में पंजाब सरकार की अधिसूचना के खिलाफ याचिका दायर करने वाले छात्र साहिल मित्तल को नोटिस जारी किया है।

चीफ जस्टिस के.जी. बालाकृष्णन और जस्टिस मुकुंदकम की बैंच ने एसजीपीसी और गुरु रामदास इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च की याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट के फैसले को पंजाब सरकार, एसजीपीसी और गुरु रामदास इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च ने चुनौती दी थी। 13 अप्रैल 2001 को पंजाब सरकार ने अधिसूचना जारी कर सिख समुदाय को अल्पसंख्यक माना था। इसे आधार बनाकर एसजीपीसी ने अपने संस्थानों में आरक्षण लागू किया था।

ये कहा था : हाईकोर्ट ने 2001 की जनगणना के आधार पर पंजाब में सिखों को अल्पसंख्यक मानने से इनकार कर दिया था। पिछली जनगणना के मुताबिक, पंजाब में 59.2 फीसदी सिख व 37 फीसदी हिंदू हैं। हाईकोर्ट ने कहा था कि सिखों के राज्य में गैर-प्रभावी समूह मानने का तथ्य मौजूद नहीं है जिससे यह साबित होता हो कि बहुसंख्यक के हाथों उनके हकों के हनन का खतरा है।

हाईकोर्ट का फैसला सुनाते 11-सदस्यीय बैंच का कहना था कि अल्पसंख्यक के निर्धारण का आधार राज्य की जनसंख्या होनी चाहिए न कि राष्ट्रीय जनसंख्या।

वैल्यू एडिशन....

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी दिया था ऐसा फैसला

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ऐसा ही एक फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच के जज ने उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को अल्पसंख्यक नहीं माना था। बाद में उस फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।





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