बाड़मेर. पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में बंद बाड़मेर के कई लोगों को सजा पूरी होने के बावजूद भी रिहाई का इंतजार है। हालांकि कुछ ने अपने परिजनों को भेजे पत्रों में शीघ्र रिहाई की उम्मीद जताई है। इधर, पाक जेलों में बंद अपनों की रिहाई के इंतजार में कई लोगों ने दम तोड़ दिया तो कुछ अंतिम सांसे गिन रहे हैं।
इन गरीब परिवारों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। विभिन्न स्तरों से इन्हें गाहे-बगाहे सिर्फ आश्वासन मिलते रहते हैं। कुछ माह पूर्व पाकिस्तानी जेलों से बाड़मेर के ही ईशानशाह व इशराराम को रिहा किया गया था। इसके बाद अन्य लोगों की भी रिहाई की उम्मीद जगी थी, लेकिन यह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।
इन जेलों में बंद हैं काफी भारतीय
पाकिस्तान की कराची, हैदराबाद, कोट लखपत, लाहौर व सक्खर जेलों में बड़ी संख्या में भारतीय कैदी बंद हैं। इनमें पंजाब, गुजरात व उत्तरप्रदेश के मछुआरे भी शामिल हैं। इन्हें पाकिस्तानी रेंजर्स ने पकड़ लिया था।
>> बाड़मेर के सात लोग पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं। इनकी रिहाई के प्रयास करने के लिए गृह मंत्रालय को लिखा गया है।
कृष्ण कुणाल, कलेक्टर बाड़मेर
केस 1
सरूपे का तला निवासी साहूराम मेघवाल 31 मई 1989 को पाक रेंजर्स ने पकड़ा था। उसका पुत्र मेघाराम उस समय आठ साल का था। साहूराम के बिछोह के सदमे को पत्नी लक्ष्मी व बेटी दया सहन नहीं कर पाईं। घटना के छह माह के भीतर ही दोनों की मौत हो गई थी। साहूराम की एक पत्र 6 नवंबर 1989 व दूसरा 27 फरवरी 1990 को पाक की हैदराबाद सेंट्रल जेल से आया था। बाद में उसकी कोई जानकारी नहीं है।
केस 2
समेजो की ढाणी निवासी बींजाराम को भी 22 फरवरी 1999 को पाक रेंजर्स ने उस समय पकड़ा था जब वह बीएसएफ के लिए लकड़ियां काट रहा था। हैदराबाद सेंट्रल जेल में बंद बींजाराम को दो साल पहले मलीर जेल भेजा गया था। उसने वहीं से गत वर्ष परिजनों को पत्र लिखकर सूचित किया था कि उसकी सजा पूरी हो चुकी है उसने जल्दी ही रिहाई की आशा भी जताई थी। लेकिन इससे बाद से उसकी कोई सूचना नहीं है।
केस 3
भीलों का तला निवासी टीलाराम पुत्र किरताराम का पाकिस्तानी जेल से काफी समय से खत नहीं आया है। इससे उसके परिजन भी परेशान हैं।
केस 4
आरबी की गफन निवासी मीरू खान सितंबर 1999 से लापता है। उसके भाई इब्राहीम खान के अनुसार पाक रिश्तेदार ने उसके जेल में होने की सूचना दी।