उज्जैनबहुत सारे सदस्यों का खुशहाल संयुक्त परिवार विदेशों में अकेलेपन से जूझ रहे भारतवंशियों को ध्यान में रखकर बनाई हिंदी फिल्मों का विषय रहा है। हालांकि ‘हम साथ-साथ हैं’ की यह अवधारणा इतनी दुर्लभ भी नहीं है, इसका सबूत 65 सदस्यों के एक परिवार से मिलता है। यहां की पटेल कॉलोनी स्थित छह भाइयों के संयुक्त राघवानी परिवार में १६ पुरुष, १६ महिलाएं और ३3 बच्चे एक छत के नीचे रहते हैं। सबसे बड़े प्रीतम राघवानी (६७) हैं और ईश्वरदास (६५), इंदरमल (६२), सेवाराम (६१), देवीदास (५८) और जेठानंद (५२) उनके छोटे भाई हैं। बंटवारे के बाद भारत आया यह परिवार उज्जैन में आकर बस गया था।
40 हजार का राशन
रोज सबका खाना एक ही चूल्हे पर तैयार होता है। हर सदस्य का अपना व्यवसाय है। परिवार का भोजन पकाने के लिए रोज करीब १५ किलो आटा और एक बोरी सब्जी लगती है। चाय-कॉफी आदि पर प्रतिदिन करीब २क् लीटर दूध की खपत होती है। इस तरह कुल मिलाकर हर महीने ४क् हजार रुपए के राशन की जरूरत होती है। सदस्यों के बीच में कामकाज का पारदर्शी बंटवारा है। दो मंजिला मकान में १७ कमरे, एक किचन, एक हॉल और छोटा मंदिर है।
साथ जाना हो तो बस
राघवानी परिवार को अगर कहीं एक साथ घूमने जाना हो तो पूरी बस किराए पर लेनी पड़ती है। उन्हें एक साथ देखकर लोग दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं।
परिवार बड़ा होने के फायदे बहुत हैं, बशर्ते सभी अपनी जिम्मेदारी समझें।
- प्रीतम राघवानी, परिवार के मुखिया