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वनवासी ईसाइयों को वन अधिकार नहीं

उदयपुर. ईसाई बन चुके सैकड़ों आदिवासियों को अब वन अधिकारों से वंचित होने की चिंता सता रही है। धर्म बदलने के कारण क्षेत्र के पटवारियों ने इन्हें अधिकारों से वंचित रखने को कह दिया है। ऐसे लोगों ने प्रशासन से मदद मांगने और न्यायालय का सहारा लेने की तैयारी कर ली है।

उदयपुर के पई, बाघपुरा, डूंगरपुर व बांसवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई ग्रामीणों की जाति ईसाई लिखी गई है। इनमें ज्यादातर वे ही ग्रामीण हैं, जो अपना धर्म बदल चुके हैं।

केंद्र सरकार द्वारा ‘अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006’ लागू करने की तैयारी की जा रही है। अनुसूचित जनजाति व्यक्ति का जिस भूमि पर 13 दिसंबर 2005 से पूर्व का कब्जा है, उसको कब्जे का अधिकार दिया जाएगा।

मेवाड़ व आसपास क्षेत्रों में जनजाति व अन्य वनवासियों को यह अधिकार देने के लिए कार्रवाई की जा रही है। जिले के पई गांव में कुछ लोग पटवारी तक पहुंचे तो उन्हें कहा गया है कि उनकी जाति ईसाई लिखी गई है। इसलिए उन्हें इसका लाभ नहीं मिल सकता है। गौरतलब है कि विधानसभा में धर्म स्वातं˜य बिल पर चर्चा के दौरान भी इस मुद्दे पर बहस हुई थी कि जो लोग धर्म बदल चुके हैं, उन्हें अन्य लाभ नहीं मिलने चाहिए।

>> रेवन्यू रिकार्ड में कुछ लोगों की जाति ईसाई लिख दी गई है। जनजाति न ईसाई है और न ही हिंदू है। कानूनन उन्हें यह अधिकार मिलना चाहिए। जनजाति लोगों को हक नहीं मिला तो प्रशासन से मदद मांगी जागी। जरूरत पड़ने पर न्यायालय की शरण में जाएंगे।
जसवंत राणा, फादर पेंटिकोस्टल चर्च

>> लैंड रेवेन्यू एक्ट 1956 के तहत किसी की जाति गलत लिखी गई है तो वे धारा 136 में सबूत के साथ आवेदन कर सकते हैं। जनजाति के अलावा कोई अन्य भी परंपरागत वन निवासी हैं, उन्हें भी इसका लाभ दिया जाएगा।
रामजीवन मीणा, अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रशासन





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