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Shekhawati Shekhawati शिवगंज.
हौसला बुलंद हो तो तकदीर बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। यह कर दिखाया है जिले की उन महिलाओं ने जो अनपढ़ हैं या फिर थोड़ी लिखी-पढ़ी हैं। उनका हौंसला इतना बुलंद है कि वे आज पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। हाड़ तोड़ मेहनत-मजदूरी के कार्यो को अंगीकार कर वे अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि पांच वर्ष पूर्व राज्य सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूह योजना शुरू की थी। क्षेत्र की महिलाएं योजना से जुड़ दस से तीस रुपए तक अंशदान देकर बैंक से ऋण प्राप्त कर निर्माण क्षेत्र में कदम रख रही हैं, जिन पर कभी पुरुषों का एकाधिकार हुआ करता था।
क्षेत्र में संचालित सरियादेवी स्वयं सहायता समूह, ब्रrाणीमाता स्वयं सहायता समूह, संतोषीमाता स्वयं सहायता समूह, पद्मावती स्वयं सहायता समूह आदि से जुड़ी महिलाएं घर की चौखट से बाहर निकलकर मिट्टी से ईंट, सकोरा, मोती से बनने वाली वस्तुएं, आरी-तारी सहित अन्य कई निर्माण कार्य कर अपना वर्चस्व कायम कर स्वयं को सबला कहने का अधिकार हासिल कर रही हैं।
तपती धूप..परवाह नहीं
बडगांव क्षेत्र में ब्रrाणी माता स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं घर का कामकाज निबटाने के बाद समूह की ओर से संचालित ईटों के भट्टे पर कार्य करने चली जाती हैं और वे तपती धूप की परवाह किए बिना दिनभर कड़ी मेहनत व लगन से ईंटों का निर्माण करती हैं। इस कार्य में वे किसी पुरुष का सहयोग नहीं लेती। इसमें ये महिलाएं प्रति वर्ष पचास हजार से अधिक का लाभ अर्जित कर रही हैं।
जरूरत नहीं पुरुषों के सहयोग की एक समय था जब सकोरा बनाने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले चाक पर पुरुषों का दबदबा था, लेकिन सरियादेवी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस एकाधिकार को खत्म कर दिया है। समूह की महिलाएं सकोरों के लिए मिट्टी तैयार करने, चाक को घुमाने तथा सकोरा बनाने और उन्हें बाजार में बेचने तक का कार्य खुद कर प्रतिदिन 50 से 60 रुपए की आय अर्जित कर रही हैं।
घरेलू कार्य प्रभावित नहीं ब्रrाणीमाता स्वयं सहायता समूह की सदस्य जेठीबाई ने बताया कि ऐसा नहीं है कि उनके इन कार्यो में रुचि लेने से घरेलू कार्यो पर प्रभाव पड़ा है। वे घर के सभी कार्यो को आसानी से निबटा लेती हैं। इतना ही नहीं बच्चों की सार-संभाल का कार्य भी वे बखूबी निभाती हैं।
उत्पाद बेचने में भी महारत सरियादेवी स्वयं सहायता समूह की तीजाबाई व खीमादेवी ने बताया कि पहली बार व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रखने पर पहले तो थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन धीरे-धीरे उत्पाद को बाजार में बेचने की महारत हासिल हो गई। अब उनके उत्पाद बाजार में आसानी से बिक जाते हैं।
बढ़ा आत्मविश्वास स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार के क्षेत्र में कदम रखने वाली महिलाओं की मेहनत व आत्मविश्वास को देख क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी अब समूहों से जुड़ने को लालायित है। महिला पर्यवेक्षक मेरी सेम्यूअल ने बताया कि कई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ब्यूटीपार्लर, साबुन, वाशिंग पाउडर, अचार, मुरब्बे आदि का प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।
अंशदान बढ़ाना चाहती हैं महिलाएं स्वरोजगार के क्षेत्र में प्रतिमाह 10 रुपए अंशदान प्रदान कर वस्तुओं के निर्माण क्षेत्र में कदम रखने वाली सरियादेवी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने कार्य से इतनी उत्साहित हैं कि वे अब अपना अंशदान बढ़ाकर 50 रुपए करना चाहती हैं।
ऋण में रखी साख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बैंक से ऋण प्राप्त कर अपना व्यवसाय शुरू करने वाली ये महिलाएं अब तक बैंक से दो बार ऋण उठा लाभ अर्जित कर चुकी हैं। समूहों की कार्यशैली से बैंकों में भी उनकी अच्छी खासी साख है।